IPL 2026 में हर 100 में से 20 कैच छूटे:पांच शतकवीरों ने जीवनदान के बाद जमाई सेंचुरी


क्रिकेट में एक पुरानी कहावत है- ‘कैच पकड़ो, मैच जीतो’। लेकिन आईपीएल 2026 में ‘कैच छोड़ो, मैच हारो’ का नया चलन हावी हो गया है। टीमों की कैच टपकाने की गलती उन्हें सीधे हार की ओर धकेल रही है क्योंकि जीवनदान मिलने के बाद बल्लेबाज विपक्षी टीमों को बुरी तरह धो रहे हैं। सीजन में अब तक लगे 9 शतकों में से 5 शतक ऐसे बल्लेबाजों ने जड़े हैं, जिन्हें फील्डिंग टीम ने कम से कम एक बार कैच छोड़कर ‘जीवनदान’ दिया था। शुरुआती 41 मैचों तक सीजन में टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी 80.25 प्रतिशत है। इसका मतलब फील्डर्स ने कैचिंग के हर 100 में से लगभग 20 मौके गंवाए हैं। यह 2018 से अब तक एक आईपीएल सीजन में पांचवां सबसे खराब फील्डिंग प्रदर्शन है। इस मामले में टॉप पर पिछला सीजन है, जहां 41 मैचों के फेज तक टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी सिर्फ 75.89% थी। जीवनदान के बाद बैटर के 40+ रन; 78 प्रतिशत मैच हारी टीमें कैच टपकाने का खामियाजा टीमों को हार के रूप में चुकाना पड़ रहा है। मौजूदा सीजन में 18 पारियां ऐसी रही हैं, जहां जीवनदान पाने वाले बल्लेबाज ने 40+ रन बनाए। इनमें से 14 मैचों में (लगभग 78%) फील्डिंग करने वाली टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी। यह आंकड़ा पिछले नौ आईपीएल सीजनों में सबसे खराब है। कैच छूटने के बाद बैटर्स औसतन 17 रन जोड़ रहे हैं, जो 2018 के बाद से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। दिल्ली को 5 में से 3 हार तब मिलीं, जब उन्होंने किसी का कैच छोड़ा और उसने मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। इसमें सैमसन (115*), अभिषेक (135*) के शतक हैं। इन 3 मौकों पर कैच छोड़ना पड़ा टीमों पर भारी एक ही दिन में रिकॉर्ड 16 कैच छूटे, इससे रिकॉर्ड 986 रन बन गए 25 अप्रैल को सीजन के सातवें डबल हेडर के दो मैचों में रिकॉर्ड 16 कैच छोड़े गए थे। इसका आलम यह रहा कि दोनों मुकाबले मिलाकर कुल 986 रन बने, जो आईपीएल इतिहास में एक दिन में सर्वाधिक हैं। इस दौरान पंजाब ने दिल्ली के खिलाफ 265 रन का लीग इतिहास का सर्वोच्च और हैदराबाद ने राजस्थान के खिलाफ 229 रन का जयपुर वेन्यू का सर्वोच्च रन चेज किया।

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