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गर्मी के कारण संकट वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है।
गर्मियों के चरम पर पहुंचते ही देश के जलाशयों में संकट गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के प्रमुख जलाशयों से पानी का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरा है।
देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के अंतिम सप्ताह तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है, जो इनकी कुल क्षमता का मात्र 24.75% है।
मई के शुरुआती हफ्ते में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी था, जो कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा मतलब यह है कि इस एक महीने के भीतर ही गर्मी और भारी खपत के कारण देश के मुख्य जल स्रोतों से करीब 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो चुका है।
एक दिन पहले ही मौसम विभाग ने अल नीनो के चलते सूखे की आशंका जताई है। ऐसे में यह एक नई चिंता है क्योंकि 15 बांधों में स्टॉक सामान्य से आधा रह गया है। राहत की बात यह है कि यह वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस साल के औसत से थोड़ा बेहतर बना हुआ है, लेकिन तेजी से खाली हो रहे बांध आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर रहे हैं।

गंभीर संकट वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15
मई के महीने में पारा चढ़ने के साथ ही जलाशयों से पानी का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। महीने की शुरुआत में जल भंडारण की स्थिति काफी नियंत्रण में दिख रही थी और देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से अधिक था।
लेकिन भीषण गर्मी के कारण महीने के अंत तक आते-आते अत्यधिक खाली हो चुके और गंभीर संकट वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है।
दक्षिण भारत न्यूनतम स्तर पर जल
पानी की कमी की सबसे भयावह तस्वीर दक्षिण भारत के राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर न्यूनतम स्तर पर है। मई की शुरुआत में इनमें कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा हुआ था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर केवल 17.55% रह गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में किल्लत बढ़ गई है।
कई जलाशय पूरी तरह सूख चुके
देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वहां के बड़े बांध पूरी तरह मैदान में तब्दील हो चुके हैं। महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे जलाशय मई की शुरुआत से लेकर महीने के अंत तक लगातार पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया है।
6 जल विद्युत प्रोजेक्ट पर असर
पानी की इस भारी गिरावट का सीधा असर देश के बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। देश की 20 जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से मई की शुरुआत में जहां 8 परियोजनाओं में पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे था, वहीं अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति नाजुक है।
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