मुंबई1 घंटे पहले
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पिछले कारोबारी हफ्ते में देश की टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 6 का कुल मार्केट वैल्यूएशन 88,678.1 करोड़ रुपए बढ़ गया है। इस तेजी में ICICI बैंक टॉप गेनर रहा। बैंक की वैल्युएशन 29,588.75 करोड़ रुपए बढ़कर 9.95 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई।
ICICI बैंक के अलावा HDFC बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केट कैप भी बढ़ा है। वहीं बाजार की इस तेजी के बीच टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते घटी है। जिसमें भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के नाम शामिल हैं।

रिलायंस देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी
मार्केट कैप के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में पहले नंबर पर बनी हुई है। इसके बाद दूसरे स्थान पर HDFC बैंक, तीसरे पर भारती एयरटेल, चौथे पर ICICI बैंक और पांचवें पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है। इस लिस्ट में छठे स्थान पर TCS, सातवें पर बजाज फाइनेंस, आठवें पर लार्सन एंड टुब्रो, नौवें पर LIC और दसवें स्थान पर हिंदुस्तान यूनिलीवर मौजूद है।
बीते हफ्ते सेंसेक्स 297 अंक चढ़ा था
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में छुट्टियों की वजह से कम दिन कामकाज हुआ। इसके बावजूद बीते हफ्ते सेंसेक्स 297 अंक चढ़ा था। वहीं गुरुवार 25 जून को सेंसेक्स अपने डे हाई से 703 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी भी 24,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 109 अंक (0.14%) की बढ़त के साथ 77,100 पर और निफ्टी 34 अंक (0.14%) बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था।

एक्सपर्ट का क्या है कहना
रेलीगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी (SVP) अजीत मिश्रा के मुताबिक, बाजार ने छुट्टियों के कारण छोटे रहे इस हफ्ते का अंत मामूली बढ़त के साथ किया है। चार कारोबारी सत्रों में से तीन में बाजार में बढ़त देखी गई।
अजीत मिश्रा ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी, पश्चिम एशिया में सुधरते भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा चुनिंदा खरीदारी से बाजार का सेंटिमेंट मजबूत बना रहा।
मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?
मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।
इसे एक उदाहरण से समझें…
मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।
कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…
| बढ़ने का क्या मतलब | घटने का क्या मतलब |
| शेयर की कीमत में बढ़ोतरी | शेयर प्राइस में गिरावट |
| मजबूत वित्तीय प्रदर्शन | खराब नतीजे |
| पॉजिटीव न्यूज या इवेंट | नेगेटिव न्यूज या इवेंट |
| पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट | इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट |
| हाई प्राइस पर शेयर जारी करना | शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग |
मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।
- निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।
- उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
