मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। कांग्रेस को उम्मीद है कि शीर्ष अदालत से उसे राहत मिल सकती है, क्योंकि अब मतदान और मतगणना से पहले न्यायिक हस्तक्षेप क
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बता दें कि 8 जून को मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई।
भाजपा का आरोप था कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक केस की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।
सुबह 11:30 बजे दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में मीनाक्षी नटराजन इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करने जा रही हैं।

नई दिल्ली में कांग्रेस की बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी।
देर रात ऑनलाइन याचिका दायर की थी
इसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की ओर से 10 और 11 जून की दरमियानी रात करीब 1:48 बजे ऑनलाइन याचिका दाखिल की गई। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि जब तक याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक चुनाव परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले को शुक्रवार के लिए लिस्टेड कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा चुनाव प्रक्रिया पर असर
आज सुनवाई में कांग्रेस यह तर्क रख सकती है कि नामांकन निरस्तीकरण की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हुई, जबकि भाजपा और निर्वाचन पक्ष रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय को नियमों के अनुरूप बताएंगे। अदालत का रुख तय करेगा कि चुनाव प्रक्रिया पर इसका कोई असर पड़ेगा या नहीं।
आज की सुनवाई के संभावित नतीजे
- सुप्रीम कोर्ट यदि प्रथम दृष्टया कांग्रेस के तर्कों में दम पाता है तो वह मामले में नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई तय कर सकता है।
- अदालत चाहे तो चुनाव परिणाम या उससे जुड़ी किसी प्रक्रिया पर अंतरिम निर्देश भी दे सकती है।
- कोर्ट को तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं लगती है तो याचिका पर नियमित सुनवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है।
- ऐसे में राज्यसभा चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया यथावत जारी रहेगी।
यदि फैसला मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में आता है…
- सुप्रीम कोर्ट मीनाक्षी को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने के निर्देश दे सकता है।
- यदि सुप्रीम कोर्ट सीधे हस्तक्षेप करता है तो तीनों राज्यसभा सीटों का चुनाव रद्द हो सकता है।
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100(1)(c) के तहत गलत तरीके से नामांकन खारिज होना चुनाव रद्द करने का आधार है।
- ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को दोबारा चुनाव कराना पड़ेगा।
यदि फैसला मीनाक्षी के खिलाफ आता है…
- रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला सही माना जाएगा।
- बीजेपी के निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों की जीत बरकरार रहेगी।
- वे बिना किसी कानूनी बाधा के राज्यसभा सांसद बनेंगे।
- कांग्रेस के लिए इस सीट पर कानूनी चुनौती का रास्ता लगभग खत्म हो जाएगा।

राष्ट्रपति से मिलने दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायक
मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में कांग्रेस के सभी विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग करने की घोषणा की है।
हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति 12 और 13 जून को उत्तराखंड दौरे पर रहेंगी। 13 जून को वे देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी।

कांग्रेस विधायक राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं।
राष्ट्रपति से मुलाकात भी मुश्किल
ऐसे में कांग्रेस विधायकों की राष्ट्रपति से मुलाकात संभव होती नहीं दिख रही है। राज्यसभा चुनाव की तीन सीटों को लेकर पहले से ही सियासी मुकाबला चर्चा में है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के लिए यह मामला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न बन गया है।

राजधानी में बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों को रिटर्निंग ऑफिसर ने निर्वाचन प्रमाण पत्र दिया।
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