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- Petroleum Minister: Companies Processing Expensive Crude Oil From Iran War; Rs 74,781 Cr Loss
नई दिल्ली4 मिनट पहले
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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के दाम पर बात की।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी या नहीं, इस पर फैसला अगले दो-तीन महीनों में ही लिया जा सकता है। अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईरान जंग के समय जब दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब भारतीय तेल कंपनियों ने महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदा। रिफाइनरियां अभी उसी महंगे स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं।
लागत से कम दाम पर तेल-गैस बेचने की वजह से देश की सरकारी तेल कंपनियों को 30 जून तक 74,781 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे आने लगी हैं। अगर यही पैटर्न 2-3 महीने तक चला तो कुछ महीनों में तेल कीमतों में राहत की उम्मीद है।
मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे
मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है।

अभी सरकारी कंपनियों ने नहीं घटाए दाम अभी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
प्राइवेट कंपनी का पेट्रोल-डीजल सस्ता
देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। अब भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए से घटकर 114.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए से घटकर 99.57 रुपए पर आ गया है।
कच्चे तेल की कीमत घटने पर फैसला
27 फरवरी को अमेरिका-ईरान जंग से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 72 डॉलर प्रति बैरल पर थे, जो युद्ध के के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए थे। दोनों देशों के बीच समझौते के बाद अब वापस कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। इसके बाद नायरा ने पेट्रोल-डीजल के दाम कम किए।

पेट्रोलियम मंत्री ने घाटे का आंकड़ा दिया
- पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पेट्रोल पर 19,905 करोड़ रुपए की अंडर रिकवरी हुई, जबकि डीजल पर यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रसोई गैस पर अप्रैल से जून के बीच कंपनियों को 24,148 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
- उन्होंने कहा पिछली तिमाहियों और पिछले साल के LPG के नुकसान को भी जोड़ दिया जाए, तो तेल कंपनियों का कुल नुकसान (टोटल अंडर रिकवरी) 2.1 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच जाता है। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर कंपनियों का कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपए रहा है।
क्या होती है अंडर-रिकवरी?
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं लेकिन घरेलू बाजार में सरकारी तेल कंपनियां आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कीमतें उस अनुपात में नहीं बढ़ातीं, तो लागत से कम कीमत पर तेल बेचने से होने वाले इस अंतर को ‘अंडर-रिकवरी’ कहा जाता है।

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