जितेन्द्र कुमार | चित्रकूट3 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

चित्रकूट जिले की कर्वी तहसील के कोल्हुवामाफी गांव में आजादी के करीब आठ दशक बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंची है, बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यालय नहीं है और इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि विद्यालय न होने से शिक्षा व्यवस्था भी बाधित है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग के बावजूद गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं।
समाजसेविका ने डीएम से की मुलाकात
ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर समाजसेविका अर्चना उपाध्याय सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से मुलाकात कर गांव की बदहाल स्थिति से अवगत कराया और बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
डीएम ने रिपोर्ट तलब कर निरीक्षण का दिया आश्वासन
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद वह स्वयं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ गांव का स्थलीय निरीक्षण करेंगे, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों को विकास की नई उम्मीद
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा प्रत्येक गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की है और यदि कोल्हुवामाफी गांव अब तक इससे वंचित रह गया है तो विभागों के समन्वय से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि इस बार बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव तक पहुंच सकेंगी।
