Champat Rai Reveals Nripendra Mishra Role

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी से शुरू हुई ‘अंदरूनी कलह’ अब खुलकर सामने आ गई है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट मिलने के संकेत के बाद चंपत राय बंसल ने 9 पन्नों का लेटर जारी किया था। इसमें राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा

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मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य बताते हैं- चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा ने एक इंटरव्यू में सुरक्षा, सीसीटीवी के डिलीट होने और 1,500 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल उठाकर चंपत राय को घेरा था। इसके बाद चंपत ने अचानक दूरी बनाकर अयोध्या के कारसेवकपुरम में ‘एकांतवास’ में चले गए थे।

उस दौरान उनके विरोधियों को लगा कि चंपत की पकड़ ढीली पड़ गई है। लेकिन, चंपत राय ने शांत रहकर सही वक्त का इंतजार किया और एसआईटी की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होते ही सीधा ‘काउंटर-अटैक’ किया।

तस्वीर 4 अगस्त की है, जब चंपत राय ने तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की थी।

तस्वीर 4 अगस्त की है, जब चंपत राय ने तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की थी।

हर 15 दिन पर नृपेंद्र अयोध्या आए, लेकिन चंपत से नहीं मिले

चंपत इस बात से भी नाराज दिखते हैं कि नृपेंद्र हर 15 दिन पर अयोध्या आते हैं। निर्माण समिति की मीटिंग में शामिल होते हैं। फिर लखनऊ या दिल्ली के लिए लौट जाते हैं। नृपेंद्र मिश्रा इस बीच जब भी अयोध्या आए, कभी भी चंपत राय से मुलाकात नहीं की। यह साबित करता है कि मतभेद सिर्फ पत्राचार तक सीमित नहीं हैं, दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला तकरीबन टूट चुका है।

इस विवाद में एक पहलू यह भी है कि नृपेंद्र मिश्रा पूर्व IAS अधिकारी हैं। वहीं, चंपत राय विश्व हिंदू परिषद से आते हैं, जो राम मंदिर आंदोलन से सीधे जुड़े रहे हैं। यही वजह है, लेटर में चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्रा ने हमेशा खुद को ही मंदिर निर्माण के सभी निर्णयों का सर्वेसर्वा माना।

आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़ा एक भी ऐसा निर्णय नहीं है, जो निर्माण समिति ने खुद न लिया हो। अगर ट्रस्ट ने कोई सुझाव दिया भी, तो उसे अमान्य कर दिया गया या बने हुए निर्माण को हटा दिया गया। लेटर के सख्त तेवर से संकेत मिल रहा है कि मंदिर निर्माण के दौरान कंपनियों के चयन और वित्तीय फैसलों में पारदर्शिता नहीं रखी गई।

अब चंपत राय के इस कदम को नृपेंद्र मिश्रा का हस्तक्षेप खत्म करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मंदिर निर्माण मार्च, 2027 के बाद पूरा हो जाएगा। सभी निर्माण ट्रस्ट को सौंपने के बाद समिति का क्या औचित्य रहेगा, यह ट्रस्ट ही तय करेगा।

इस मामले में दैनिक भास्कर ने नृपेंद्र मिश्रा से बात की। उन्होंने कहा-

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मैं लेटर को देखने के बाद ही कुछ कह सकता हूं। अभी लेटर पढ़ा नहीं है। मैं ये नहीं मान सकता हूं कि चंपत राय ने मेरे लिए लेटर में कुछ लिखा है।

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9 पन्नों के लेटर में 33 बिंदुओं से नृपेंद्र पर सीधे सवाल

चंपत राय ने अपने 9 पन्नों के लेटर में 33 बिंदु शामिल किए हैं। इनमें मंदिर आंदोलन के संघर्ष से लेकर अब तक के निर्माण कार्यों का ब्योरा दिया गया है। लेटर के जरिए चंपत राय ने पहली बार सीधे नृपेंद्र मिश्रा की कार्यशैली और एकतरफा फैसलों पर कड़ा एतराज जताया।

चंपत राय की चिट्ठी

चंपत राय ने 9 पन्नों का लेटर जारी किया है।

चंपत राय ने 9 पन्नों का लेटर जारी किया है।

  • चंपत राय ने लिखा- 1528 में बाबर की सेनाओं ने राम जन्मभूमि मंदिर तोड़ा। इसके बाद अयोध्या के संतों, स्थानीय राजाओं-रियासतों और गृहस्थ समाज की ओर से मंदिर की भूमि हासिल करने के लिए संघर्ष जारी रहा। 1949 में स्थानीय समाज के उस स्थान पर कब्जा करने के बाद यह संघर्ष समाप्त हुआ।
  • 1950 से 1989 के बीच स्थानीय अदालतों में 4 वाद दायर किए गए। इन मुकदमों को वाद दायर करने वालों ने अपने स्तर पर लड़ा। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की 3 सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। करीब 15 साल तक चली सुनवाई के दौरान तीनों न्यायाधीशों ने स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लिखे और कुल निर्णय करीब 8,500 पन्नों का रहा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की। 3 सदस्यीय मध्यस्थता समिति बनाई गई थी। मार्च से जुलाई- 2019 तक कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
  • इसके बाद 6 अगस्त, 2019 से सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू की। 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया, जिसके बाद राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।
राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र हर महीने निर्माण कामों का निरीक्षण करते थे।

राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र हर महीने निर्माण कामों का निरीक्षण करते थे।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से स्वतंत्र ट्रस्ट बनाया। इसमें कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई। एक स्थान निर्मोही अखाड़ा और एक स्थान अनुसूचित जाति/जनजाति प्रतिनिधित्व के लिए सुरक्षित रखा। अयोध्या के जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आईएएस अधिकारियों को पदेन न्यासी बनाए गए।
  • विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के मंदिर निर्माण से जुड़े सुझाव नृपेंद्र मिश्र को बताए गए। मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चयन किया गया। निर्माण की निगरानी के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को चुना गया। मंदिर परिसर के दूसरे भवनों की डिजाइन के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट्स फर्म और उसके प्रमुख जय काकतीकर को जिम्मेदारी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण काम चल रहा है। इसे पब्लिक के लिए दिसंबर, 2027 तक खोला जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण काम चल रहा है। इसे पब्लिक के लिए दिसंबर, 2027 तक खोला जा सकता है।

राममंदिर में दर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं का उल्लेख

  • रामपथ पर बिरला धर्मशाला के सामने यात्री सेवा केंद्र बनाया गया है। यहां पहले परिवहन निगम का बस अड्डा था। ट्रस्ट ने जमीन खरीदकर दो मंजिला प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनवाया है।
  • 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रोजाना 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं। महाकुंभ के दौरान रोजाना 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे।
  • रामलला दर्शन के लिए 8 लाइनें बनाई गई हैं। इनमें 1 विशिष्ट लाइन दर्शन, 1 सुगम या व्हीलचेयर दर्शन और 6 सामान्य लाइन हैं। सभी के रास्ते अलग हैं, जिससे क्रॉसिंग की स्थिति नहीं बनती।
  • VIP दर्शन के दौरान भी सामान्य श्रद्धालुओं का दर्शन जारी रहता है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और न्यायाधीशों के लिए अलग व्यवस्था है।
  • असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त व्हीलचेयर उपलब्ध है। भजन, कीर्तन, सुंदरकांड के लिए भी परिसर में फ्री व्यवस्था की जाती है।
  • ट्रस्ट के बैंक खातों में चेकबुक का इस्तेमाल नहीं होता। सभी भुगतान बैंक ट्रांसफर के जरिए होते हैं और नकद भुगतान नहीं किया जाता। ट्रस्ट के खाते SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं।
  • ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट कराया जाता है। वैधानिक ऑडिट दिल्ली की फर्म वी. शंकर अय्यर करती है।

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