काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के कार्डियोलॉजी विभाग ने मात्र 1.2 किलोग्राम वजन वाले एक अत्यंत छोटे प्रीटर्म शिशु के हृदय का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है। राज्य में पहली बार किसी सरकारी संस्थान ने ‘पिकोलो (PICCOLO)’ ड
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ये डाक्टरों की टीम जिन्होंने सफल इलाज किया।
30 दिनों से वेंटिलेटर पर था मासूम
29 सप्ताह में जन्मे इस शिशु की स्थिति काफी नाजुक थी और वह पिछले 30 दिनों से वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहा था। उसे पेंटेंट डक्टस आर्टेरियोसस नामक बीमारी थी, जिसमें हृदय की धमनियों के बीच का रास्ता प्राकृतिक रूप से बंद नहीं हो पाता। पिकोलो डिवाइस तकनीक के जरिए बिना ओपन हार्ट सर्जरी के एक छोटे कैथेटर की मदद से इस छेद को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया।
अब जानिए डॉक्टरों ने क्या कहा
आईएमएस बीएचयू के डॉ. विकास ने बताया कि इससे पहले यह प्रक्रिया लखनऊ के दो केंद्रों पर हुई थी, लेकिन वहां अन्य राज्यों से विशेषज्ञ बुलाने पड़े थे। बीएचयू की इस सफलता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह इन-हाउस टीम ने अंजाम दिया है। इतने कम वजन के शिशु में यह प्रक्रिया अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है।