देवीलाल गुप्ता | संतकबीर नगर5 मिनट पहले
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संतकबीरनगर की बखिरा झील को विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म सेंटर बनाने की योजना अब जमीन पर उतरने की ओर बढ़ रही है। डीएम आलोक कुमार के नए प्रस्ताव पर पर्यटन निदेशालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
परियोजना के लिए करीब 15 एकड़ जमीन खरीदने और इस पर 13.74 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। अब जिला प्रशासन से सरकारी और निजी जमीन की उपलब्धता का पूरा ब्योरा मांगा गया है। जमीन की स्थिति साफ होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता तय होगा।
पर्यटन निदेशक ईको पुष्प कुमार ने 2 सितंबर 2026 को डीएम को पत्र भेजकर परियोजना के लिए जरूरी जमीन की जानकारी मांगी है। प्रशासन को बताना होगा कि कितनी सरकारी जमीन उपलब्ध है और कितनी जमीन निजी लोगों से खरीदनी पड़ेगी। इसके आधार पर जमीन खरीदने की जरूरत और संभावित खर्च का आकलन किया जाएगा।
42 करोड़ की डीपीआर में जमीन के लिए 13.74 करोड़
बखिरा झील के विकास के लिए डीएम आलोक कुमार ने 19 जून 2026 को नए सिरे से डीपीआर सरकार को भेजी थी। पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 42 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें 13.74 करोड़ रुपए जमीन खरीदने के लिए रखे गए हैं। अब सरकार की ओर से जमीन की उपलब्धता का ब्योरा मांगे जाने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
सीएम ने भी वैश्विक पहचान दिलाने की बात कही थी
डीपीआर भेजने के कुछ दिन बाद 25 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैजनाथ धाम से बखिरा झील को ईको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित करने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने की बात कही थी। इसके बाद पर्यटन निदेशालय की सक्रियता से परियोजना को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
जमीन मिलते ही विकास कार्यों की राह होगी आसान
फिलहाल परियोजना के लिए सबसे जरूरी काम जमीन की स्थिति साफ करना है। अगर पर्याप्त सरकारी जमीन मिल जाती है तो निजी जमीन खरीदने की जरूरत और लागत कम हो सकती है। प्रशासन की रिपोर्ट के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। परियोजना पूरी होने पर बखिरा झील पूर्वांचल के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकती है।
