गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ सोमवार से आगरा में गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। किसी ने अपने घर के लिए आकर्षक गणपति लिए तो किसी ने प्रतिष्ठान और पंडालों में स्थापना के लिए मूर्ति ली।
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सोमवार को विधि-विधान के साथ घरों और प्रतिष्ठानों में गणपति विराजमान हुए। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर सुबह 10 बजकर 59 मिनट से दोपहर 1 बजकर 27 मिनट तक स्थापना का शुभ मुहूर्त रहा। इस बार भी कमला नगर के गणपति शहर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कमला नगर-बल्केश्वर में गणेश चौक स्थित पंडाल में 25 फीट ऊंचे, 6.7 टन वजनी गणपति विराजमान किए गए
25 फीट ऊंचे, 6.7 टन वजनी गणपति कमला नगर-बल्केश्वर में गणेश चौक स्थित पंडाल में पोला भाई ग्रुप की ओर से 19वें गणेश महोत्सव के लिए 25 फीट ऊंचे और करीब 6.7 टन वजनी गणपति की मूर्ति विराजमान कराई गई। आयोजक पोला भाई ने बताया कि प्रतिमा को कोलकाता और नासिक के कारीगरों ने दो महीने की मेहनत से तैयार किया है। समिति उपाध्यक्ष राजा शर्मा ने बताया कि 11 दिन तक प्रतिदिन तीन बार आरती होगी।
दुर्वा और मोदक से होगा पूजन गणेश पूजन में पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली, चंदन और मोदक अर्पित किए जाएंगे। गणेश जी को दुर्वा चढ़ाने की परंपरा है, जबकि तुलसी दल नहीं चढ़ाया जाता। 21 मोदक का भोग और ॐ श्री गं गणपतये नम: मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी माना गया है।
मध्याह्न काल में स्थापना का विशेष महत्व ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रेश कौशिक ने बताया कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना गया है, इसलिए इसी अवधि में स्थापना और पूजन का विशेष महत्व है। चतुर्थी तिथि सोमवार सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर मंगलवार सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। मान्यता के अनुसार घर में बैठी मुद्रा की प्रतिमा और दुकान या कार्यालय में खड़ी मुद्रा की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करना शुभ होता है। घर में बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति शुभ माने गए हैं। प्रतिमा की स्थापना पूर्व-उत्तर दिशा में करनी चाहिए और मुख सीधे मुख्य द्वार की ओर नहीं रखना चाहिए।
चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता ज्योतिषाचार्य यशोवर्धन पाठक के अनुसार गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। सोमवार को सुबह 8 बजकर 55 मिनट से रात 8 बजकर 8 मिनट तक चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस अवधि में चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक का दोष लग सकता है।