दिल्ली47 मिनट पहले
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भारतीय स्पिनर चोट की वजह से अफगानिस्तान टी-20 सीरीज से बाहर हो गए हैं। उन्हें साइड स्ट्रेन हुआ है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, BCCI के एक सूत्र ने बताया कि वरुण की MRI में नई चोट सामने आई है। उनके एशियन गेम्स में खेलने की संभावना भी कम है।
वरुण ने रविवार को सीरीज का पहला टी-20 मैच खेला था। भारत ने यह मुकाबला 7 विकेट से जीता। वरुण ने 4 ओवर में 16 रन देकर 1 विकेट लिए थे। उनके रिप्लेसमेंट का ऐलान नहीं किया गया है।
वरुण चोट से उबर कर इस सीरीज में वापसी कर रहे थे। उनकी दोबारा चोटिल होने पर BCCI के बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) पर फिर सवाल उठ रहे हैं।

वरुण ने पहले टी-20 में 1 विकेट लिया था।
2 महीने बाद वापसी कर रहे थे वरुण
वरुण करीब दो महीने तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहे थे। उन्हें इससे पहले जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच खेलने के दौरान बाएं हैमस्ट्रिंग में परेशानी हुई थी। इसके बाद स्कैन में ग्रेड-2 हैमस्ट्रिंग इंजरी सामने आई थी।
इस चोट के कारण वह जिम्बाब्वे टी-20 सीरीज से बाहर हो गए थे। तब BCCI ने बताया था कि वरुण आगे के इलाज और मैनेजमेंट के लिए CoE जाएंगे। रिहैबिलिटेशन पूरा करने के बाद उन्होंने अफगानिस्तान सीरीज में वापसी की थी।
हर्षित राणा भी रिहैब के दौरान चोटिल हुए थे
वरुण से पहले हर्षित राणा भी CoE में रिहैबिलिटेशन के दौरान फिर चोटिल हो गए थे। राणा अफगानिस्तान सीरीज और एशियन गेम्स, दोनों से बाहर हो चुके हैं।
पहले BCCI ने कहा था कि राणा रिहैबिलिटेशन में अच्छी प्रगति कर रहे थे। इसके बाद 7 सितंबर को मैच सिमुलेशन के दौरान बॉलिंग करते समय उन्हें रेक्टस फेमोरिस स्ट्रेन हो गया। उनकी जगह यश ठाकुर को अफगानिस्तान सीरीज और एशियन गेम्स में शामिल किया गया था।

हर्षित 7 सितंबर को मैच सिमुलेशन के दौरान बॉलिंग करते समय फिर चोटिल हो गए थे।
CoE के इंजरी मैनेजमेंट पर फिर सवाल उठा
हाल के समय में BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर इंजरी मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि इस पर पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने CoE को दोषी मानने से इनकार किया था। उन्होंने कहा- ‘क्रिकेटर मशीन नहीं है। ऐसा नहीं है कि हर बार वे जल्दी चोट से उबर जाएंगे।’
लक्ष्मण ने कहा कि फिटनेस के नियम कड़े हैं। साथ ही सभी खिलाड़ियों के शरीर का नेचर भी अलग है। इस वजह से कोई खिलाड़ी तय समयसीमा में पूरी तरह फिट नहीं हो पाता। उन्होंने कहा था- ‘चोट का पता होने से लेकर खिलाड़ी के फिट होकर जाने तक उसकी मॉनिटरिंग होती है। इसी के आधार पर उसका वर्कलोड बढ़ाया जाता है।’

लक्ष्मण ने खिलाड़ी के इंजरी से फिट होने तक का प्रोसेस समझाया
लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा था कि सिलेक्टर्स CoE से खिलाड़ी की फिटनेस की रिपोर्ट मांगता है। CoE यह रिपोर्ट सिलेक्शन कमिटी के प्रेसिडेंट को भेजता है। इसकी कॉपी दोनों टीमों के हेड कोच और BCCI को भी दी जाती है।
लक्ष्मण ने कहा- ‘बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक स्टार चिन्ह लगा होता है। इसका मतलब है- फिट रहने पर खेलेंगे। अगर खिलाड़ी की प्रोग्रेस धीमी होती है, तो सिलेक्शन कमिटी प्रेसिडेंट और हेड कोच को इन्फोर्मेशन दी जाती है।

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