जौनपुर कोर्ट ने एआरटीओ का वेतन रोकने का दिया आदेश:8 लाख मुआवजे की वसूली में लापरवाही पर ट्रिब्यूनल का बड़ा आदेश


जौनपुर में बीमाविहीन ट्रक से हुई सड़क दुर्घटना में क्षतिपूर्ति राशि की वसूली में ढिलाई पर मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल जज मनोज कुमार अग्रवाल ने लखनऊ के एआरटीओ का वेतन रोकने का आदेश दिया है। अदालत ने यह निर्देश उस स्थिति में जारी किया जब क्षतिपूर्ति वसूली के लिए दिए गए ट्रक जब्ती के आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके साथ ही हैदरगढ़ के तहसीलदार को भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि वाहन स्वामी की संपत्ति मौजूद हो तो उसे जब्त कर न्यायालय को सूचित किया जाए। 2017 का है मामला, ट्रक की चपेट में हुई थी मौत यह मामला 18 फरवरी 2017 का है। उस दिन बदलापुर निवासी लालजी गुप्ता की उनकी दुकान के सामने ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने ट्रक मालिक अनीता (निवासी हैदरगढ़, बाराबंकी), चालक सुखपाल और संबंधित पक्षों के खिलाफ क्षतिपूर्ति का मुकदमा दायर किया था। जांच में सामने आया कि दुर्घटना के समय ट्रक का बीमा नहीं था। कोर्ट ने तय किया था 8 लाख मुआवजा 6 सितंबर 2019 को अदालत ने वाहन स्वामी अनीता को आदेश दिया था कि वह दो माह के भीतर मृतक के परिजनों को 8 लाख रुपये, 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, अदा करें। रिकॉर्ड के अनुसार, अनीता ने बाद में ट्रक पवन कुमार गुप्ता को बेच दिया था, जिन्होंने आगे यह वाहन रणजीत सिंह (लखनऊ) को स्थानांतरित कर दिया। वर्तमान मालिक को दुर्घटना की जानकारी नहीं थी। रिकवरी सर्टिफिकेट के बावजूद नहीं हुई वसूली क्षतिपूर्ति राशि की वसूली के लिए कोर्ट ने रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किया था और ट्रक जब्त करने का आदेश भी दिया गया, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। इसी लापरवाही पर अब अदालत ने एआरटीओ का वेतन रोकने और तहसील प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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