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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई रद्द कर दी है। यह कार्रवाई सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध न करने पर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि विभाग की अपेक्षा के मुताबिक निर्णय न लेना अपने आप में कदाचार नहीं है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने आईएएस राजेश कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, लखनऊ के 19 दिसंबर 2025 के आदेश समेत आरोपपत्र, विभागीय जांच और सभी दंडात्मक आदेश रद्द किए। कोर्ट ने 12 हफ्ते में राजेश कुमार सिंह के सभी सेवा, पदोन्नति और आर्थिक लाभ बहाल करने का निर्देश दिया। यह मामला ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष एमके सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच से जुड़ा था। राजेश कुमार सिंह तब भारी उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव और मुख्य सतर्कता अधिकारी थे। उन्होंने विभाग के निर्देश पर एमके सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सुनवाई में अभियोजन अधिकारी की सलाह पर राजेश कुमार सिंह ने आपत्ति नहीं जताई। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने उन पर विभागीय कार्रवाई शुरू की थी।
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क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति न जताने पर IAS पर कार्रवाई:हाईकोर्ट ने कहा- विभाग के अनुसार फैसला न लेना कदाचार नहीं, 12 हफ्ते में सभी लाभ बहाल होंगे