लापता को खोजने को परिवार को नहीं देनी होगी गाड़ी:पुलिस को हर थाने के लिए मिला अलग बजट, अलीगढ़ पुलिस की नई व्यवस्था


अलीगढ़ में युवती या किशोरी के घर छोड़ने के बाद उसकी तलाश में पुलिस को दूसरे जिले या राज्य जाना पड़ा तो अब परिवार को वाहन की व्यवस्था नहीं करनी होगी। अलीगढ़ पुलिस ने पहली बार सभी 30 थानों के लिए अलग विवेचना बजट तय किया है। थानों को हर महीने 25 हजार से 50 हजार रुपए मिलेंगे। इसी रकम से पुलिस जरूरत पड़ने पर निजी वाहन किराए पर लेने के साथ ट्रेन का टिकट भी खरीद सकेगी। SSP नीरज जादौन ने जिले के 30 थानों को अपराध संख्या और आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है। बड़े थानों को 50 हजार, मध्यम थानों को 40 हजार और छोटे थानों को 25 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। इस रकम का इस्तेमाल दूर-दराज के जिलों और दूसरे राज्यों में दबिश और बरामदगी के लिए किया जाएगा। परिवार से वाहन या खर्च मांगा तो कार्रवाई नई व्यवस्था के तहत अगर किसी युवती या किशोरी की बरामदगी के लिए पुलिस को दूसरे जिले या राज्य जाना पड़ता है तो वाहन का इंतजाम पुलिस अपने स्तर से करेगी। जरूरत के हिसाब से निजी वाहन किराए पर लिया जा सकेगा। दूसरे राज्य में जाना हो और सड़क मार्ग की जगह ट्रेन से जाना बेहतर हो तो टीम का टिकट भी इसी बजट से लिया जाएगा। SSP ने थाना प्रभारियों और सर्किल अधिकारियों को व्यवस्था का पूरी तरह पालन कराने के निर्देश दिए हैं। अगर किसी परिवार से बेटी की बरामदगी के लिए वाहन या उसका खर्च मांगे जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 8 महीने में 865 मुकदमे, 800 मामले युवती-किशोरी से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी से अगस्त तक जिले में ऐसे 865 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें लोग घर छोड़कर गए थे। इनमें करीब 800 मामले युवतियों और किशोरियों के किसी के साथ जाने या घर छोड़ने से जुड़े थे। यानी हर महीने औसतन करीब 100 मामले सामने आए। पुलिस के अनुसार जनवरी से अगस्त तक दर्ज मामलों में लापता किशोरियों और युवतियों की बरामदगी की जा चुकी है। सितंबर में दर्ज मामलों में भी पुलिस तलाश और बरामदगी पर काम कर रही है। पहले परिवार से मांगा जाता था वाहन अब तक दूसरे जिले या राज्य में लोकेशन मिलने पर कई बार पुलिस टीम को ले जाने के लिए परिवार से वाहन की व्यवस्था करने को कहा जाता था। परिजन वाहन उपलब्ध कराते थे और पुलिस टीम दबिश के लिए जाती थी। नई व्यवस्था के बाद इस तरह की जरूरत में पुलिस सरकारी बजट से वाहन और यात्रा का खर्च उठाएगी। बरामदगी के बाद युवती या किशोरी को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सखी वन स्टॉप सेंटर में पुलिस निगरानी में रखा जाता है। इसके बाद अदालत के निर्देश के अनुसार उसे परिजनों के सुपुर्द किया जाता है या आगे की कार्रवाई की जाती है। शिकायतों के बाद बदली व्यवस्था SSP के पास ऐसी शिकायतें भी पहुंची थीं, जिनमें अभिभावकों ने बताया कि बेटी की तलाश के लिए पुलिस के कहने पर वाहन उपलब्ध कराया गया, लेकिन इसके बावजूद बरामदगी नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस ने बरामदगी के दौरान होने वाले वाहन और यात्रा खर्च को सरकारी मद से देने की व्यवस्था लागू की। SSP नीरज जादौन ने कहा कि हर थाने को उसकी श्रेणी के हिसाब से विवेचना मद में रकम दी जाएगी। अब बरामदगी के लिए परिवार से वाहन या उसका खर्च लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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