लखीमपुर में सड़क पर टहलते दिखे 3 टाइगर:कार सवार युवकों ने मोबाइल में रिकॉर्ड किया VIDEO, ग्रामीणों में दहशत बढ़ी


लखीमपुर खीरी में बुधवार रात मझगई वन रेंज के धर्मापुर-कोलवा फार्म मार्ग पर 3 टाइगर दिखाई दिए। सड़क पर एक साथ तीनों को देखकर कार सवार युवक घबरा गए। युवकों ने मोबाइल फोन से बाघों का वीडियो बना लिया। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। वहीं कुछ देर बाद तीनों टाइगर सड़क किनारे गन्ने के खेत में चले गए। इस क्षेत्र में अक्सर बाघों का खतरा बना रहता है। देखिए 2 तस्वीरें… पुलिया के पास सड़क पर बैठे थे चारों बाघ मझगई वन रेंज के धर्मापुर से कोलवा फार्म जाने वाले मार्ग पर बुधवार रात करीब 8 बजे तीन बाघ एक साथ दिखाई दिए। कोलवा फार्म निवासी काकू सिंह और गुरजीत सिंह कार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पुलिया के पास उनकी नजर सड़क पर बैठे बाघों पर पड़ी। चारों बाघ काफी देर तक सड़क पर ही बैठे रहे। कार सवार युवकों ने मोबाइल फोन निकालकर उनका वीडियो बना लिया। इसके बाद बाघों को सड़क से हटाने के लिए करीब 5 मिनट तक हॉर्न बजाया। लगातार हॉर्न बजने के बाद तीनों टाइगर सड़क से हटकर पास के गन्ने के खेत में चले गए। रात में घर से निकलने से डर रहे ग्रामीण सड़क पर एक साथ तीनों बाघों की मौजूदगी का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई। वन विभाग की टीम को मौके पर भेजकर स्थिति की जानकारी ली गई। वन विभाग की टीमें भी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं। यहां पास में जंगल का क्षेत्र है, इसलिए बाघों की आवाजाही बनी रहती है। एक साथ चार बाघ दिखाई देने के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रात के समय घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं। लोगों को आशंका है कि बाघ जंगल से निकलकर गांवों और खेतों की ओर भी आ सकते हैं। खेतों में सतर्कता से जाने की अपील वन विभाग ने ग्रामीणों से रात में अकेले बाहर नहीं निकलने, सतर्क रहने और बाघ दिखाई देने पर उसके पास न जाने की अपील की है। टीम इलाके में निगरानी कर रही है। रेंजर अंकित सिंह ने बताया कि इलाके में पहले भी चार बाघ देखे गए थे। इसमें बाघिन के साथ उसके दो शावक देखे गए हैं। शावक बड़े हैं। ग्रामीणों से अपील है कि खेतों की ओर सतर्कता के साथ जाए। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही है। टाइगर और तेंदुए को पकड़ने के लिए समय-समय पर पिंजरें भी लगाए जाते रहे हैं।

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