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बदायूं के थानों में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगें तो कार्रवाई सिपाही और दरोगा तक पहुंच रही है, लेकिन थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय होने में जांच का इंतजार हो रहा है। 15 दिन के भीतर जरीफनगर और इस्लामनगर में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाले दो मामले सामने आए। जरीफनगर में अवैध दबिश और परिवार से अभद्रता समेत तीन लोगों को अवैध कस्टडी में रखने के मामले में दरोगा समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए गए। वहीं इस्लामनगर में अफीम के साथ पकड़े गए तीन लोगों को रकम लेकर छोड़ने के आरोप में चार सिपाहियों पर कार्रवाई हुई। मामलों में थाना प्रभारियों की भूमिका भी सवालों में है। वहीं अफसर जांच के नाम पर उन्हें अंदरखाने क्लीनचिट देने की तैयारी में हैं। जरीफनगर में 7 सितंबर की रात बस्तोई सीकरी चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज पुलिसकर्मियों के साथ दूसरे चौकी क्षेत्र के दियोहरा शेखपुर गांव में दबिश देने पहुंचे थे। आरोप था कि एनडीपीएस के मामले में वांछित व्यक्ति के घर दबिश के बाद उसके परिवार के लोगों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। शिकायत के बाद एसएसपी अंकिता शर्मा ने चौकी प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। बाद में एक अन्य सिपाही रॉबिन शर्मा को भी लाइन हाजिर किया गया। मामले की विभागीय जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह को दी गई। जांच के दौरान जरीफनगर थाना प्रभारी बाबूराम गौतम की भूमिका को लेकर भी स्पष्टीकरण लिया गया। अब विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट एसएसपी को भेजी जानी है। यानी कार्रवाई झेल चुके पुलिसकर्मियों की भूमिका तो जांच में तय हो गई, लेकिन थाना प्रभारी की जिम्मेदारी पर फैसला अभी बाकी है। इसी बीच इस्लामनगर में पुलिस पर इससे भी गंभीर आरोप सामने आए। आरोप है कि पुलिस ने तीन लोगों को अफीम के साथ पकड़ा और बाद में मोटी रकम लेकर छोड़ दिया। मामले में चार सिपाहियों पर कार्रवाई की गई है। व्यवस्था पर सीधा सवाल
दोनों मामलों ने थाने की निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा किया है। अगर थाना क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मी दूसरे इलाके में अवैध दबिश दे रहे थे, परिवार से मारपीट की शिकायत सामने आई और थाना स्तर पर इसकी जानकारी नहीं हुई तो निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? इसी तरह तीन लोगों को मादक पदार्थ के साथ पकड़ने और फिर उन्हें छोड़ने जैसी गंभीर घटना में थाना प्रभारी को इसकी जानकारी थी या नहीं, यह जांच का अहम बिंदु है।
कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल दोनों मामलों में सिपाही और दरोगा कार्रवाई झेल चुके हैं। जरीफनगर में बाबूराम गौतम और इस्लामनगर में धनंजय सिंह की भूमिका पर जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। ऐसे में लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि विभागीय कार्रवाई केवल नीचे के पुलिसकर्मियों तक सीमित रहती है या थाने की कमान संभालने वालों की जिम्मेदारी भी तय होती है। दोनों मामलों की जांच एसपी सिटी कर रहे हैं। एसपी सिटी ने बताया कि जांच जारी है, जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई तय है।
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