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बांदा में 9 करोड़ रुपये के कोडीनयुक्त कफ सीरप मामले में अब तीसरी मेडिकल एजेंसी पर कार्रवाई की तैयारी है। हमीरपुर के टेढ़ा मोड़ स्थित ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह एजेंसी मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के बहनोई रवींद्र गुप्ता के नाम पर बताई गई है। 3 सितंबर को एसटीएफ ने कोडीनयुक्त कफ सीरप की जो खेप पकड़ी थी, उसके बिल ओम मेडिकल एजेंसी के नाम से मिले थे। इसके बाद औषधि विभाग ने एजेंसी के कारोबार और रिकॉर्ड की जांच शुरू की। औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने एजेंसी संचालक को नोटिस जारी कर कोडीनयुक्त कफ सीरप की खरीद-बिक्री समेत अन्य बिंदुओं पर जवाब मांगा था। तय समय में जवाब न मिलने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार को लाइसेंस रद्द करने का पत्र तैयार कर लिया गया है। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद एजेंसी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस रद्द इससे पहले अतर्रा की श्री श्याम मेडिकल एजेंसी और मामा मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस भी रद्द किए जा चुके हैं। इनमें श्री श्याम मेडिकल एजेंसी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन और मामा मेडिकल एजेंसी प्रवीण उर्फ लकी के नाम पर संचालित थी। जांच के दौरान लाइसेंस से जुड़ी गड़बड़ियां और कुछ दवाओं के बिल न मिलने जैसी कमियां सामने आई थीं। वहीं, अतर्रा की श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस अभी रद्द नहीं किया गया है। सहायक आयुक्त के अनुसार, इस एजेंसी के नाम कोडीनयुक्त कफ सीरप से संबंधित कोई बिल नहीं मिला है। संचालक ने विभागीय नोटिस का जवाब भी दे दिया है। हालांकि, संबंधित दवाओं की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। पुलिस मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के बहनोई रवींद्र गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। हमीरपुर के बरुआ निवासी रवींद्र की तलाश में हमीरपुर, महोबा, कानपुर और आगरा समेत करीब 24 ठिकानों पर पुलिस पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस के अनुसार, 9 सितंबर को उसकी आखिरी लोकेशन हमीरपुर में मिली थी, जिसके बाद से उसका मोबाइल बंद है। रवींद्र के करीबियों और रिश्तेदारों के 12 से अधिक मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए हैं। पुलिस ओम मेडिकल एजेंसी के माध्यम से हुई दवाओं की खरीद-बिक्री, भुगतान और रुपये के लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाल रही है। एजेंसी के जरिए माल की आपूर्ति जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि एजेंसी के जरिए माल की आपूर्ति किन लोगों तक हुई और भुगतान किस माध्यम से किया गया। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि रवींद्र की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द उसे गिरफ्तार किया जाएगा। मामले में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस अब सप्लाई नेटवर्क की आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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कोडीन कफ सीरप मामले में ओम मेडिकल एजेंसी पर शिकंजा:बांदा में लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया पूरी, आरोपी के बहनोई के नाम