प्रयागराज सुलेम सराय में आज दधिकांदो मेला सजेगा:कृष्ण-बलदाऊ की झांकियां निकलेंगी, अंग्रेजों के दौर से चली आ रही परंपरा


प्रयागराज की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल दधिकांदो मेले का उत्साह रविवार को सुलेम सराय में देखने को मिलेगा। शनिवार को सलोरी से शुरू हुए मेले की कड़ी में 13 सितंबर को सुलेम सराय-धूमनगंज क्षेत्र में आयोजन होगा। इसके बाद शहर के दूसरे इलाकों में भी मेले का सिलसिला जारी रहेगा। सुलेम सराय का दधिकांदो मेला भगवान श्रीकृष्ण और बलदाऊ की भक्ति, झांकियों और शोभायात्रा के लिए जाना जाता है। मेले की शुरुआत ऐतिहासिक ठाकुरद्वारा मंदिर में श्रीकृष्ण-बलदाऊ की पूजा से होगी। इसके बाद सजाई गई झांकियों के साथ शोभायात्रा निकलेगी। हाथी पर सवार श्रीकृष्ण-बलदाऊ की झांकी, पांडव दल, हनुमान जी की झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक-सामाजिक संदेशों पर आधारित चौकियां मेले का आकर्षण रहती हैं। चौफटका से बेगम बाजार तक कई किलोमीटर में मेला सुलेम सराय का दधिकांदो मेला अपने बड़े स्वरूप के लिए भी जाना जाता है। चौफटका से बेगम बाजार तक मुख्य सड़कों और गलियों में देर रात तक भीड़ रहती है। रोशनी से सजी सड़कें, झांकियां और धार्मिक आयोजन पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग देते हैं। पिछले साल भी मेला करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था। अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है मेले की परंपरा दधिकांदो मेले का इतिहास अंग्रेजी शासनकाल से जुड़ा बताया जाता है। उस दौर में कैंट क्षेत्र में सभाओं और आयोजनों पर रोक के बीच धार्मिक आयोजनों ने लोगों को एकजुट करने और जनजागरूकता फैलाने में भूमिका निभाई। इसी वजह से दधिकांदो मेले की परंपरा को स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की जनचेतना से भी जोड़कर देखा जाता है। समय के साथ मेले में सामाजिक और सांस्कृतिक रंग भी जुड़ते गए। जन्माष्टमी के बाद शुरू होने वाली दधिकांदो मेले की परंपरा का समापन कीडगंज में कंस वध की परंपरा के साथ होता है। पुरानी परंपरा के साथ दिखेगा आधुनिक रंग सुलेम सराय का दधिकांदो मेला आज भी पुरानी परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। रविवार को श्रीकृष्ण-बलदाऊ की झांकियों, रोशनी और शोभायात्रा के साथ पूरा सुलेम सराय क्षेत्र भक्ति और उल्लास में डूबा नजर आएगा।

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