सहारनपुर की मस्जिद को प्रशासन द्वारा बुलडोजर से गिराने का मामला तूल पकड़ गया हैं। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में इलाहाबाद हाईकोर्ट याचिका दाखिल की है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में केस पर सुनवाई हो सकती है।
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दूसरी ओर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शुक्रवार को इस मामले पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।
जिला महानगर यूनिट प्रयागराज का कहना है कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट स्थित सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद प्रशासन द्वारा असंवैधानिक तरीके से ध्वस्त किए जाने के विरोध में डीएम से मुलाकात कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन देंगे।
9 सितंबर को दाखिल हुई याचिका
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से दाखिल की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने पर्याप्त कानूनी नोटिस और वैध ध्वस्तीकरण आदेश के बिना कार्रवाई की।
याचिका में भूमि के स्वामित्व और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 यानी वर्शिप एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

मस्जिद कमेटी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
16 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर कब्जा माना
जानकारी के मुताबिक, सहारनपुर में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को संबंधित मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे के रूप में माना था। अदालत ने मस्जिद प्रबंधन पर जुर्माना भी लगाया था।
इसके बाद मस्जिद प्रबंधन की ओर से जिला अदालत में अपील दाखिल की गई। अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने 5 सितंबर को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
हाईकोर्ट में प्रशासनिक कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल
मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। याचिका में कार्रवाई के लिए जारी नोटिस और आदेश की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने भूमि के स्वामित्व को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। इसके साथ ही पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कार्रवाई को चुनौती दी गई है।

अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने 5 सितंबर को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
जिला प्रशासन, राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड पक्षकार
मामले में जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। मस्जिद कमेटी की याचिका पर हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और इसके लिए अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया के संबंध में पक्ष रखा जाएगा। वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से कार्रवाई को चुनौती देने के आधार अदालत के सामने रखे जाएंगे।
ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेश के अनुपालन से जुड़ा बताया गया। दोनों पक्षों की ओर से मामले को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।

मस्जिद कमेटी ने प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
मलबे से ईंटें ले जाने और पुराने कुएं की चर्चा
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मलबे से ईंटें ले जाए जाने और मौके पर एक पुराने कुएं के मिलने की चर्चा भी सामने आई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मौके से जुड़े इन तथ्यों और भूमि के स्वामित्व से संबंधित दावों का अंतिम निर्धारण प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया में होना है। अब हाईकोर्ट की सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि अदालत ध्वस्तीकरण के दौरान अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया और याचिकाकर्ता के दावों पर क्या रुख अपनाती है।