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लखनऊ के द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र की ओर से बुधवार को रिवर बैंक कॉलोनी स्थित इंजीनियर्स भवन में रॉयल चार्टर डे मनाया गया। कार्यक्रम में संस्था के गौरवशाली इतिहास, रॉयल चार्टर के ऐतिहासिक महत्व और देश में इंजीनियरिंग प्रोफेशन के विकास में संस्था के योगदान पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य अभियंताओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को संस्था की विरासत और इंजीनियरिंग क्षेत्र में उसकी भूमिका से परिचित कराना रहा। वक्ताओं ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में अभियंताओं के लिए लगातार नए ज्ञान और कौशल को सीखना जरूरी है। 13 सितंबर 1935 को मिला था रॉयल चार्टर रॉयल चार्टर डे उस ऐतिहासिक अवसर की याद में मनाया जाता है, जब द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया को ब्रिटिश सरकार की ओर से रॉयल चार्टर प्रदान किया गया था। संस्था को 13 सितंबर 1935 को यह शाही सनद मिली थी। इसके जरिए भारत में इंजीनियरिंग प्रोफेशन के विकास, अभियंताओं के हितों की रक्षा और समाज व राष्ट्र के लिए तकनीकी योगदान की संस्था की भूमिका को औपचारिक मान्यता मिली। तकनीकी ज्ञान के साथ नवाचार जरूरी कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. बी.आर सिंह ने कहा कि देश के विकास में अभियंताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।तकनीकी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। ऐसे में अभियंताओं को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ नवाचार और निरंतर सीखने को भी जरूरी बताया। समाज की जरूरतों के समाधान पर चर्चा मुख्य वक्ता इं. जी.एम पांडेय, पूर्व यूनिट हेड रेनुसागर पावर प्लांट, हिंडाल्को ने रॉयल चार्टर के ऐतिहासिक महत्व और संस्था के योगदान पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग सिर्फ तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझकर व्यावहारिक और उपयोगी समाधान तैयार करना भी है। उन्होंने अभियंताओं से तकनीकी दक्षता के साथ नवाचार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने कार्य का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक इं. जे.बी सिंह ने कहा कि रॉयल चार्टर डे जैसे आयोजन अभियंताओं को संस्था की गौरवशाली विरासत से जोड़ते हैं।
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इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स ने मनाया रॉयल चार्टर डे:लखनऊ में संस्था के गौरवशाली इतिहास और इंजीनियरिंग में योगदान पर हुई चर्चा