हसनगंज थाने में अवैध हिरासत,14-लाख के जेवर लूटने के आरोप:HC ने उन्नाव SP को दिए जांच के निर्देश, 27-30 जुलाई तक की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश


उन्नाव के हसनगंज थाने में एक व्यक्ति को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने और करीब 14 लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवरात, नकदी व अन्य सामान लूटने के आरोपों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्नाव के एसपी को व्यक्तिगत रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं। 27 से 30 जुलाई तक हिरासत में रखने का आरोप मामले में याचिकाकर्ता राम कुमार ने क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि हसनगंज थाना पुलिस ने उन्हें 27 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखा। याचिकाकर्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों और विपक्षी पक्ष संख्या सात ने कथित रूप से मिलकर करीब 14 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात, 35 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और करीब 15 कारतूस अपने कब्जे में ले लिए। याचिका में इस पूरी कार्रवाई में पुलिस की कथित भूमिका का भी आरोप लगाया गया है। थाने की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हसनगंज थाने की 27 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक की सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, फुटेज जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि याचिकाकर्ता इस अवधि में थाने में मौजूद था या नहीं और उस दौरान थाने में क्या गतिविधियां हुईं। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सीधे उन्नाव एसपी को दी है, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। तीन सप्ताह में देना होगा हलफनामा कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार की ओर से तीन सप्ताह के भीतर उन्नाव एसपी का व्यक्तिगत हलफनामा, जांच रिपोर्ट और जवाबी हलफनामा अदालत में प्रस्तुत किया जाना है। अब मामले में पुलिस की जांच और थाने की CCTV फुटेज अहम साक्ष्य मानी जा रही है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस महकमे की ओर से लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जाएगी।

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