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रिश्तों में स्वार्थ नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम ही सबसे बड़ा आधार है। श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथावाचक जया किशोरी ने प्रेम, कर्म और मोक्ष का संदेश देते हुए कहा कि भगवान भी सच्चे प्रेम के आगे स्वयं को समर्पित कर देते हैं। कथा समाप्ति पर हजारों श्रद्धालु भावुक हो गए और पूरे पंडाल में ‘राधे-राधे’ व ‘हरि बोल’ के जयकारे गूंजते रहे। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथावाचक जया किशोरी ने जरासंध वध, श्रीकृष्ण के 16,108 विवाह, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत निस्वार्थ प्रेम है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी प्रेम के कारण अपनी ठकुराई छोड़ अर्जुन का सारथी बनना स्वीकार किया और दुर्योधन का राजसी भोजन छोड़ विदुर के घर सादा भोजन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता। जया किशोरी ने कर्म के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। सुख मिले तो भगवान का धन्यवाद करें और दुख मिले तो उनका नाम स्मरण करें। उन्होंने कहा कि पहले समाज में वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर थी और हर वर्ग समाज की सेवा के लिए कार्य करता था, लेकिन आज अधिकांश लोग केवल अपने हित तक सीमित हो गए हैं। कथा विश्राम के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पंडाल पूरा भर जाने के कारण कई लोगों ने खड़े होकर कथा सुनी। कथा समाप्त होने के बाद जया किशोरी की विदाई के समय कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इसके बाद भजनों पर श्रद्धालु देर तक भक्ति में झूमते रहे।
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निस्वार्थ प्रेम से ही रिश्ते निभते हैं: जया किशोरी:कथा के अंतिम दिन कर्म और मोक्ष का भी महत्व श्रद्धालुओं को समझाया