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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों और चुनाव से जुड़े लंबे विवाद में दाखिल विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सोसायटी के चुनाव और पदाधिकारियों के अधिकार संबंधी विवादों का निपटारा सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की धारा 25(1) के तहत निर्धारित प्राधिकारी ही करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा दायर विशेष अपीलों पर सुनवाई के बाद पारित किया। इन अपीलों में एकल पीठ के 19 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पूरे विवाद को निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष भेजने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने एकल पीठ के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। न्यायालय ने इस दलील से सहमति जताते हुए विशेष अपीलें निरस्त कर दीं। न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि आर्य प्रतिनिधि सभा का विवाद लगभग एक दशक से अदालतों और रजिस्ट्रार के बीच लंबित है। हर बार मामला पुनर्विचार के लिए लौटाया गया, लेकिन इसका अंतिम समाधान नहीं हो सका। कोर्ट ने यह भी कहा कि संस्था के भीतर वर्चस्व की लड़ाई उसके मूल उद्देश्यों पर भारी पड़ रही है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सदस्यता से जुड़ा कोई विवाद चुनाव परिणाम को प्रभावित करता है, तो उसे चुनाव विवाद से अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में, निर्धारित प्राधिकारी सदस्यता और चुनाव, दोनों से संबंधित प्रश्नों का एक साथ निस्तारण करेगा। यह मामला आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021 से जुड़ा है, जब विभिन्न गुटों ने अलग-अलग चुनाव कराकर अपने-अपने प्रधान घोषित कर दिए थे। इसके बाद रजिस्ट्रार ने चारों गुटों के चुनावों की वैधता पर विचार किया। इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां एकल पीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपीलें दाखिल की गई थीं, जिन्हें अब खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।
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आर्य प्रतिनिधि सभा चुनाव विवाद में लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला:निर्धारित प्राधिकारी ही करेगा अंतिम निर्णय, विशेष अपीलें खारिज