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लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान में विज्ञान, सिनेमा और पर्यावरण पत्रकारिता पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह आयोजन ‘पृथ्वी-2026: भारतीय पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव एवं राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान संचार संवाद’ का दूसरे दिन था । इस दौरान मास्टरक्लास, वृत्तचित्र प्रदर्शन, परिचर्चा और प्रतियोगी फिल्मों के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान, जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान संचार के अन्य पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ विज्ञान फिल्मकार नंदन कुध्यादी की मास्टरक्लास से हुई। उन्होंने प्रो. बीरबल साहनी और आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के जीवन व योगदान को फिल्मों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के तरीके साझा किए। इस सत्र में उनकी लघु फिल्म ‘एक वैज्ञानिक के वेश में क्रांतिकारी’ का भी दिखाया गया। प्रो. साहनी के जीवन और कार्यों पर आधारित फिल्म दिखाई पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में बताया। इसके अलावा, प्रो. बीरबल साहनी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक फिल्म के अंश प्रदर्शित किए गए। वक्ताओं ने भारतीय पुराविज्ञान की नींव रखने और पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में बताया । अशोक कुमार ने ‘सतत भविष्य की कहानियां: पर्यावरण पत्रकारिता की शक्ति’ विषय पर मास्टरक्लास लिया। उन्होंने बताया कि लेखन ऐसा होना चाहिए, जिसे पाठक पहली बार में ही आसानी से समझ सकें। रिपोर्टिंग केवल समस्याओं तक सीमित न रहे उन्होंने पर्यावरण पत्रकारिता में जिज्ञासा, विश्वसनीयता और संवेदनशीलता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। अशोक ने यह भी कहा कि रिपोर्टिंग केवल समस्याओं तक सीमित न रहे, बल्कि समाधान और वैज्ञानिक तथ्यों को भी सामने रखें। इसके बाद जलवायु परिवर्तन पर आधारित प्रतियोगी वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों में पर्यावरणीय चुनौतियों, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को प्रमुखता से दर्शाया गया। दूसरे सत्र में ‘पृथ्वी विज्ञान में जनसहभागिता: विज्ञान संचार, मीडिया और सिनेमा के माध्यम से सेतु निर्माण’ विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर ध्रुव सेन सिंह ने की। वक्ताओं ने वैज्ञानिक शोध को सरल, विश्वसनीय और रोचक तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने की बात कही।
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लखनऊ में पृथ्वी विज्ञान महोत्सव:दूसरे दिन विज्ञान, सिनेमा और पर्यावरण पत्रकारिता पर हुई चर्चा