Bihar Social Media Gunda CCA Act

बिहार में अब सोशल मीडिया पर गाली-गलौज या अमर्यादित टिप्पणी करने पर सीधे गुंडा एक्ट लगेगा। ऐसा करने पर एक साल तक की जेल या दो साल तक जिला या राज्य से बाहर किए जा सकते हैं।

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नया गुंडा एक्ट क्या है, सरकार ने क्या आलोचना बंद करने के लिए कानून बनाया, कौन-कौन इसकी जद में आएगा, समझेंगे; बूझे की नाही में…।

सवाल-1ः सोशल मीडिया पर अपशब्द कहने पर जेल होगी। नया गुंडा एक्ट क्या है?

जवाबः 20 जुलाई की शाम सम्राट कैबिनेट ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) 2024 में एक संशोधन को मंजूरी दी। इसके जरिए सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट्स, गाली-गलौज या ट्रोलिंग करने वालों को असामाजिक तत्वों की श्रेणी में शामिल कर दिया गया।

मतलब अब तक गुंडे-माफिया पर लगने वाले CCA एक्ट के दायरे में सोशल मीडिया यूजर भी आ गए हैं। उन पर भी जिलों के DM (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) CCA यानी गुंडा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई कर सकते हैं।

बिहार के अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) को जानिए…

29 फरवरी 2024 को विधानसभा में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम-2024 को ध्वनि मत से पारित किया गया। इसके बाद यह कानून मार्च 2024 से राज्य में लागू हो गया। उस वक्त अधिनियम में साफ कहा गया था कि इसके दायरे में मुख्य रूप से असामाजिक तत्व आएंगे।

असामाजिक तत्व उन्हें माना जाएगा जिसके खिलाफ कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले के 24 महीनों के दौरान कम से कम 2 मामलों में अदालत में पुलिस रिपोर्ट/चार्जशीट दाखिल की गई हो। जैसे…

  • महिलाओं/बच्चों की तस्करी, POCSO एक्ट के तहत यौन अपराध या महिलाओं पर अश्लील फब्तियां कसने और छेड़ने वाले।
  • धर्म, जाति, नस्ल, भाषा या समुदाय के आधार पर या अन्य किसी भी आधार पर दो धर्मों, भाषा, जाति या समुदायों के बीच शब्दों के जरिए दुश्मनी या घृणा फैलाने वाले।
  • जिन्हें बिहार पुलिस मैन्युअल के तहत ‘गुंडा’ घोषित किया गया हो या जो संगठित अपराध सिंडिकेट (गैंग) चला रहे हों, हिंसा से लाभ कमा रहे हों।
  • गैर-कानूनी तरीके से हथियार या गोला-बारूद बनाने, बेचने, सप्लाई करने या रखने वाले।
  • बालू माफिया (अवैध खनन/परिवहन करने वाले)। शराब और नशीली दवाओं की तस्करी करने या उसमें पैसा लगाने वाले।
  • आईटी एक्ट के तहत गंभीर अपराध करने वाले।
  • बलपूर्वक या धमकी देकर सरकारी, निजी या स्थानीय निकाय की जमीन/इमारत पर अवैध कब्जा करने वाले।

अब नए संशोधन के बाद सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट्स या ट्रोल करने वाले भी दायरे में आ गए हैं।

24 जुलाई तक चलने वाले बिहार विधान मंडल के मानसून सत्र का आगाज हो गया है। सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को देर शाम सम्राट कैबिनेट की बैठक हुई। तस्वीर-20 जुलाई के विधानसभा की है।

24 जुलाई तक चलने वाले बिहार विधान मंडल के मानसून सत्र का आगाज हो गया है। सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को देर शाम सम्राट कैबिनेट की बैठक हुई। तस्वीर-20 जुलाई के विधानसभा की है।

सवाल-2ः ‘अपशब्द’ या ‘अमर्यादित टिप्पणी’ के दायरे में क्या-क्या आएगा?

जवाबः सरकार ने अभी स्पष्ट नहीं किया है। कोई ड्राफ्ट जारी नहीं किया गया। लेकिन पिछली घटनाओं को देखें तो यह स्पष्ट है कि इन शब्दों के मायने बहुत व्यापक हैं और यह पूरी तरह उस वक्त की सरकार पर निर्भर करता है कि कौन से शब्द ‘अपशब्द’ या ‘अमर्यादित’ हैं। इसे एक घटना से समझिए…

  • 14 फरवरी 2024। 17 दिन पहले यानी 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार RJD का साथ छोड़कर भाजपा के साथ चले गए थे। नीतीश सरकार का बजट सत्र चल रहा था।
  • विधान परिषद में लालू-राबड़ी देवी के करीबी RJD विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह भाषण देने के लिए उठे। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मिमिक्री की और पलटू राम कहा।
  • सुनील सिंह के इस आचरण के खिलाफ सत्ता पक्ष ने विधान परिषद की आचार समिति के पास शिकायत की। जांच के लिए कमेटी बनी।
  • कमेटी ने अमर्यादित टिप्पणी का दोषी माना और उसकी रिपोर्ट पर 26 जुलाई 2024 को सुनील सिंह की सदस्यता समाप्त कर दी गई।
  • सुनील सिंह ने कमेटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सदस्यता बहाल कर दी। कोर्ट ने कहा कि पलटू राम कहना अपराध नहीं है।

हालांकि…

सरकार या पुलिस अपनी मर्जी से किसी बयान को ‘अपशब्द’ या ‘अमर्यादित’ तय नहीं कर सकती। संविधान में इसके लिए स्पष्ट पैमाने तय हैं। अदालतें 3 पैमाने पर तय करती हैं…

  1. लोक व्यवस्था पर खतरा तो नहीं: कानून की नजर में केवल किसी को बुरा लगना या गुस्सा आना अपराध नहीं है। बयान ऐसा होना चाहिए जिससे हिंसा, दंगा या समाज में नफरत फैलने का सीधा खतरा हो। अदालत यह देखती है कि क्या उस बयान से भीड़ भड़क सकती है? क्या भाषण और हिंसा के बीच सीधा और तत्कालिक संबंध है?
  2. हेट स्पीच है कि नहीं: अगर टिप्पणी किसी व्यक्ति या समूह के धर्म, जाति, भाषा, लिंग या समुदाय को निशाना बनाकर वैमनस्य या द्वेष फैलाने के उद्देश्य से की गई है, तो उसे अमर्यादित और आपराधिक माना जाता है।
  3. महिला की गरिमा को ठेस ना पहुंचे: यौन रूप से स्पष्ट टिप्पणी, नग्नता या किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों को IT एक्ट की धारा 67 और BNS की धाराओं के तहत ‘अभद्र’ घोषित किया गया है।

सवाल-3ः सरकार ने इतना सख्त कदम क्यों उठाया?

जवाबः सरकार ने इस संबंध में कोई बयान नहीं जारी किया है और ना ही कोई ऑफिशियल कारण बताया है। मानसून सत्र के बीच में कैबिनेट की बैठक हुई। जिसमें संशोधन को मंजूरी दी गई।

अंदरखाने सरकार के इस सख्त कदम के पीछे 2 थ्योरी की चर्चा है…

1. लॉ एंड ऑर्डर और डिजिटल स्पेस को सिक्योर करना

बताया जा रहा है कि सरकार ने यह कदम लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने और बढ़ते डिजिटल स्पेस को सुरक्षित करने के लिए उठाया है। सामान्यतः सोशल मीडिया ट्रोलिंग या अभद्र भाषा पर IT एक्ट की धारा 67 या BNS की हल्की धाराओं के तहत मामला दर्ज होता था। ये अक्सर जमानती होते थे, जिससे आरोपियों में कानून का डर खत्म हो गया था।

  • कई लोग बार-बार फर्जी प्रोफाइल बनाकर अभद्र टिप्पणियां करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि वे कानूनी प्रक्रिया के लूपहोल का फायदा उठाकर आसानी से छूट जाएंगे। CCA लागू होने से ऐसे अभ्यस्त अपराधियों को लंबे समय तक हिरासत में या जिलाबदर (तड़ीपार) किया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया पर महिलाओं, महिला नेताओं, पत्रकारों या आम नागरिकों को निशाना बनाकर अश्लील टिप्पणियां, मॉर्फ्ड तस्वीरें और बलात्कार/हिंसा की धमकियां देने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
  • कई बार एक आपत्तिजनक या भड़काऊ पोस्ट चंद मिनटों में वायरल कर इलाके में दंगे, हिंसा और तनाव का माहौल पैदा कर देती है।
  • भ्रामक और अभद्र सामग्री के जरिए भीड़ को भड़काने की साजिशों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को ऐसे कड़े प्रावधानों की जरूरत थी, जिससे घटना होने से पहले ही कार्रवाई की जा सके।
  • कई बार अभद्र भाषा किसी एक व्यक्ति का गुस्सा न होकर संगठित समूह का एक अभियान होता है, जिसका मकसद किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को पूरी तरह खत्म करना होता है।
  • इंटरनेट पर नफरत फैलाना एक ‘संगठित अपराध’ जैसा रूप लेने लगा, तो सरकार के लिए इसे साधारण अपराधों से अलग मानकर CCA जैसे कड़े अधिनियम के तहत लाना अनिवार्य हो गया।
  • जिस तरह सार्वजनिक सड़कों या स्थानों पर गाली-गलौज, अश्लीलता या गुंडागर्दी पर कड़ी सजा का प्रावधान है, उसी तरह सरकार डिजिटल स्पेस को भी लोगों के लिए सुरक्षित बनाना जरूरी है।

2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचना को बंद करना

सियासी गलियारे में अंदरखाने चर्चा है कि सरकार इस वक्त सोशल मीडिया पर आलोचनाओं को लेकर असहज है। पटना की NEET छात्रा रेप-हत्याकांड मामला हो या आरा के भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर का। सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर सरकार की आलोचना की।

इसके अलावा 3 साल से राज्य के युवा शिक्षक, BSSC भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उग्र हैं। सरकार सोशल मीडिया पर अपना परसेप्शन खराब नहीं होने देना चाहती। आलोचकों को कंट्रोल करने के लिए कानून का खौफ जरूरी है।

  • जैसे 15 जुलाई की घटना ही ले लीजिए। बिहार पुलिस की साइबर शाखा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की आलोचना करने पर RJD सहित 10 X हैंडल को नोटिस जारी किया। पोस्ट और वीडियो डिलीट करने का आदेश दिया। नहीं करने पर FIR करने की हिदायत दी।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद संशोधित CCA कानून बिहार में लागू हो जाएगा। इसकी जद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर होने वाले पोस्ट आएंगे।

कैबिनेट से मंजूरी के बाद संशोधित CCA कानून बिहार में लागू हो जाएगा। इसकी जद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर होने वाले पोस्ट आएंगे।

दोनों तरह की चर्चा के बीच एक फैक्ट यह भी

2024 वाले CCA कानून में भी दो धर्मों, भाषा, जाति या समुदायों के बीच शब्दों के जरिए दुश्मनी या घृणा फैलाने वालों पर CCA एक्ट के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान था। इसके बावजूद सरकार ने 20 जुलाई को फिर से संशोधित कर स्पेशली सोशल मीडिया पर भद्दे कमेंट करने वालों को शामिल किया।

सवाल-4ः …तो क्या सरकार इस कानून से अपनी आलोचना बंद कराना चाहती है?

जवाबः ज्यादा संभव है। बिहार पुलिस के पूर्व DG कहते हैं, ‘सोशल मीडिया पर अपशब्द या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने के अपराध को CCA के दायरे में लाकर सरकार ने DM और SSP/SP को असीमित पावर दे दिया है। इससे थाने से लेकर DM तक इस मामले में सीधे कार्रवाई कर सकेंगे। इसकी जद में स्वतंत्र आवाज भी आ सकती है।’

वह बताते हैं- ‘सरकार का यह फैसला तानाशाही की तरफ इशारा कर रहा है। सरकार इस कानून की आड़ में अफसरों के जरिए सरकार की पॉलिसी की आलोचना करने वालों को टारगेट करा सकती है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक बात नहीं है। चूंकि CCA एक्ट में ऐसा प्रावधान है कि यह लगने पर निचली अदालतें जमानत नहीं दे सकती। इसका फायदा सत्ता में बैठे लोग अपने विरोधियों के खिलाफ उठा सकते हैं।’

इसे कानून और सजा के प्रावधानों से समझिए…

सवाल-5ः CCA एक्ट के तहत कौन कार्रवाई करेगा?

जवाबः बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक 2024 के मुताबिक, कार्रवाई करने का अधिकार पूरी तरह प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के पास है।

  • जिला दंडाधिकारी (DM): किसी असामाजिक तत्व को क्षेत्र से बाहर निकालने का आदेश दे सकते हैं। लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यक्ति को हिरासत/नजरबंद करने का आदेश दे सकते हैं। तलाशी लेने या संपत्तियों को जब्त/नष्ट करने के आदेश जारी कर सकते हैं।
  • कमिश्नरः DM के आदेशों के खिलाफ की गई अपील पर सुनवाई कर सकते हैं और आदेश को रद्द, सही या संशोधित कर सकते हैं।
  • राज्य सरकार: हिरासत में लेने के आदेशों को मंजूरी देने, समीक्षा करने या रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। सरकार इसके लिए एक सलाहकार बोर्ड का गठन करती है (जिसमें हाईकोर्ट के जज या पूर्व जज शामिल होते हैं) जो मामलों की समीक्षा करता है।
  • पुलिस अधिकारीः DSP या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारी मामलों की रिपोर्ट/कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करा सकते हैं। इंस्पेक्टर या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारी DM के आदेश पर किसी भी स्थान, गाड़ी या वाहन की तलाशी ले सकते हैं और संदिग्ध सामान जब्त कर सकते हैं।

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