बिजनौर में भाकियू का शक्ति प्रदर्शन:हजारों किसान ने ट्रैक्टरों से घेरा कलेक्ट्रेट, PM के नाम सौंपा ज्ञापन, शहर में घंटों लगा जाम


बिजनौर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले मंगलवार को हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव किया। विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। बड़ी संख्या में किसानों और ट्रैक्टरों के पहुंचने से शहर के कई हिस्सों में घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने जजी चौक से कलेक्ट्रेट तक बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस और यातायात बल तैनात किया था। इसके बावजूद किसानों की भीड़ और ट्रैक्टरों की लंबी कतारों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। पुलिस को जाम खुलवाने और यातायात सामान्य कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अमेरिका के साथ डील और MSP को लेकर सरकार को घेरा भाकियू के जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने कहा कि प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई डील का विरोध दर्ज कराना है। उनका आरोप है कि इस समझौते से भारतीय किसानों, विशेषकर डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी किसानों को सरकार सब्सिडी देती है, जबकि भारत में किसानों को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्होंने अमेरिका से बीज आयात की योजना पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों की निर्भरता बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर सरकार के वादों को पूरा न किए जाने का भी मुद्दा उठाया। गन्ना भुगतान, बिजली और खाद की समस्याएं भी उठाईं किसानों ने ज्ञापन में क्षेत्रीय समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिलाई मिल द्वारा किसानों का गन्ना भुगतान लंबित है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण में सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाने, बिजली की लगातार ट्रिपिंग, बिना सहमति के बिजली का लोड बढ़ाए जाने और खाद की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। गुलदार के आतंक पर भी जताई चिंता प्रदर्शन के दौरान किसानों ने क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि इससे ग्रामीणों और किसानों में भय का माहौल है। भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो किसान आंदोलन को और तेज करेंगे तथा बिना समाधान के वापस नहीं लौटेंगे।

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