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पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और सोमवार को गिरिजा बैराज से 1.63 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार शाम एल्गिन ब्रिज गेज पर नदी का जलस्तर 105.820 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से मात्र 15 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में इस बढ़ोतरी से रामनगर तहसील के तटवर्ती गांवों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। बेलहरी, बाबापुरवा, सरसंडा, हेतमापुर, उधिया, कोडरी, सुंदरनगर, मदरहा और ललपुरवा सहित कई गांवों के ग्रामीण संभावित बाढ़ को लेकर चिंतित हैं। नदी का तेज बहाव किनारों पर कटान भी बढ़ा रहा है, जिससे किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि लगातार नदी में समा रही है। कई किसानों की बीघे भर जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। देखें तस्वीरें… सुंदरनगर और ललपुरवा के ग्रामीणों को विशेष चिंता है। उनका आरोप है कि बाढ़ के समय राहत एवं बचाव कार्यों के लिए रखी गई नावें वर्षों से जर्जर हालत में खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं। इन नावों की लकड़ियां सड़ चुकी हैं और उनमें दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक न तो इनकी मरम्मत कराई है और न ही नई नावों की व्यवस्था की है।
गिरिजा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि बैराज से और अधिक पानी छोड़ा जाता है, तो जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका है। तेज बहाव के कारण तटवर्ती क्षेत्रों में कटान भी जारी है। इस बीच, तहसील प्रशासन और बाढ़ कार्य खंड की टीमें नदी के जलस्तर और कटान पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और बाढ़ से निपटने के लिए सभी टीमें अलर्ट मोड में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जर्जर नावों की तत्काल मरम्मत कराने या नई नावों की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।
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सरयू का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचा:गिरिजा बैराज से 1.63 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया