कानपुर हैलेट में जूनियर डॉक्टर की मौत:ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कार्डियोलॉजी भेजा; इलाज के दौरान तोड़ा दम


कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में तैनात जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. विनोद कुमार बिंद (27) की ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। वह मूल रूप से जौनपुर के रहने वाले थे और ऑर्थोपेडिक्स विभाग में द्वितीय वर्ष के जूनियर रेजीडेंट थे। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज में शोक की लहर है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि बुधवार-गुरुवार की रात डॉ. विनोद इमरजेंसी में ड्यूटी पर थे। गुरुवार तड़के करीब पांच बजे उनके पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द शुरू हुआ। दर्द बढ़ने पर वह खुद ही मेडिसिन इमरजेंसी और आईसीयू पहुंचे। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका को देखते हुए तत्काल ईसीजी, ट्रॉप-आई (Troponin-I) समेत अन्य जरूरी जांचें कराईं। शुरुआती जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बावजूद उनका इलाज तुरंत शुरू कर दिया गया। हालत बिगड़ने पर लगाया पेसमेकर, लगातार दिया गया CPR इलाज के दौरान उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बाद मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ. विशाल गुप्ता, एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. डॉ. अपूर्व अग्रवाल और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. गौतम वाजपेयी की टीम ने उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने उनका ब्लड प्रेशर और धड़कन नियंत्रित करने के लिए लगातार सीपीआर (CPR) दिया और टैम्परेरी पेसमेकर भी लगाया, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कार्डियोलॉजी भेजा हालत गंभीर होने पर हैलट अस्पताल से एलपीएस हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की मदद से एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस के जरिए उन्हें कार्डियोलॉजी भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर पहले से मौजूद थे। विशेषज्ञों ने काफी देर तक उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गुरुवार सुबह करीब 11 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। डायबिटीज और हाई बीपी से थे पीड़ित सहकर्मियों के अनुसार, डॉ. विनोद पिछले कुछ महीनों से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे। डॉक्टरों का मानना है कि मौत का कारण हृदय संबंधी गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि, मौत के सटीक कारण की पुष्टि मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी। घटना की जानकारी उपचार के दौरान लगातार परिजनों को दी जाती रही। डॉ. विनोद के निधन से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों, जूनियर रेजीडेंट्स और कर्मचारियों में शोक का माहौल है।

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