राज प्रकाश | बस्ती4 मिनट पहले
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बस्ती में संयुक्त वाम दल (सीपीआई और सीपीआई-माले) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और विभिन्न जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर एक दिवसीय प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किया। दोपहर 12 बजे कामरेड अशर्फीलाल के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। इसमें बुलडोजर कार्रवाई, फर्जी मुकदमे दर्ज करना, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को नजरबंद करना तथा शांतिपूर्ण आंदोलनों पर रोक जैसी घटनाओं को संविधान की भावना के विपरीत बताया गया।
वाम दलों ने कहा कि असहमति की आवाज उठाने वालों, बुद्धिजीवियों, मजदूर नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमनात्मक कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गई। इसमें मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में प्रभावी कार्रवाई, नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने और अयोध्या चढ़ावा एवं दान प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग शामिल थी।
इसके अतिरिक्त, वाम दलों ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने, मजदूर नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई सुनिश्चित करने, जन आंदोलनों से पहले नेताओं की नजरबंदी समाप्त करने, आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने और पेयजल संकट दूर करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में दलित उत्पीड़न के मामलों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की जवाबदेही तय करने तथा महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई करने की भी मांग की गई।
कामरेड अशर्फीलाल ने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, भाकपा (माले) के संयोजक रामलौट ने महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन और जन आंदोलनों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की।
इस प्रतिवाद कार्यक्रम में गौरीशंकर, रामशंकर निराला, राजकुमार प्रजापति, पंचम लाल, रेनू, शांति देवी और राजेश सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
