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प्रयागराज में पंडवानी की प्रसिद्ध गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को रविवार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनके अस्थि कलश को छत्तीसगढ़ के दुर्ग से प्रयागराज लाया गया। सोमवार को संगम में पूरे विधि-विधान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा। श्रद्धांजलि सभा में उनके परिजन, कलाकार, साहित्यकार और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय) की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखकर लोककला की इस महान साधिका को अंतिम नमन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा और भावनाओं का माहौल बना रहा। दुर्ग से प्रयागराज लाया गया अस्थि कलश श्रद्धांजलि सभा से पहले डॉ. तीजन बाई का अस्थि कलश उनके परिजन छत्तीसगढ़ के दुर्ग से रेल मार्ग के जरिए प्रयागराज लेकर पहुंचे। उनके साथ पुत्र दिलहरण पारधी, पौत्र सौरभ पारधी, नाती झाकेश्वर देशमुख और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। सोमवार को संगम में उनका अस्थि विसर्जन किया जाएगा। पंडवानी को दिलाई विश्वभर में पहचान उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर थीं। उन्होंने अपने संघर्ष, समर्पण और अद्वितीय कला-साधना से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने कहा कि तीजन बाई ने साबित किया कि सच्ची प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। वहीं डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पंडवानी को दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाया। भजनों से भावुक हुआ माहौल कार्यक्रम में मनोज गुप्ता ने गायत्री मंत्र, ‘भज मन चरण राम सुखदायी’ और ‘हे राम, हे राम’ जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों के बीच पूरा सभागार भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित एम्स में 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन से देश की लोककला जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
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प्रयागराज में पद्म विभूषण तीजन बाई को श्रद्धांजलि:संगम में आज होगा अस्थि विसर्जन, कलाकारों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई