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KGMU के क्वीनमेरी अस्पताल में दलाल पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया गया।
KGMU के क्वीनमेरी अस्पताल में मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने और अवैध वसूली करने के आरोप में एक आउटसोर्स कर्मचारी को सेवा से हटा दिया गया है। मामले की गोपनीय जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित आउटस
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विश्वविद्यालय के सुरक्षा अधिकारी ने 7 जुलाई 2026 को इस संबंध में शिकायत भेजी थी। इसके बाद चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएस कुशवाहा के निर्देश पर गोपनीय जांच कराई गई। जांच के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के बयान दर्ज किए गए, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई।
खुलेआम करता था वसूली
जांच में सामने आया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत दुर्गेश निजी कक्ष आवंटित कराने, नो-ड्यूज प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर अवैध वसूली करता था। इसके अलावा वह मरीजों और तीमारदारों को निजी अस्पतालों में भेजने के लिए दलालों का नेटवर्क भी संचालित कर रहा था।
जांच के बाद जारी हुए हटाने के निर्देश
आरोप है कि दलाल मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराने, बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने और निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर जांच कराने के लिए प्रेरित करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि ये दलाल संबंधित कर्मचारी के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर चीफ प्रॉक्टर ने आउटसोर्स एजेंसी को कर्मचारी को तत्काल हटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।
कंपनी पर भी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे मामले को संस्थान की गरिमा, पारदर्शिता और मरीजों के हितों के खिलाफ माना है। आउटसोर्स एजेंसी को अपने कर्मचारी के आचरण के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 25 हजार रुपये का अर्थदंड चीफ प्रॉक्टर फंड में जमा करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करने पर एजेंसी को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की संस्तुति की जाएगी।