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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेशों की अनदेखी और मनमानी करने के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए इटावा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने बीएसए को निर्देश दिया कि व्यक्तिगत हलफनामे के साथ उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि बार-बार दिए गए न्यायिक आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अनूप कुमार सत्संगी की याचिका पर उसके अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी को सुनकर दिया है।
जानिये क्या है मामला याची की मां की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। उसने अनुकंपा के आधार पर मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे विभाग ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि उस समय तृतीय श्रेणी का कोई पद रिक्त नहीं था। इस पर याची ने याचिका दाखिल की तो सुनवाई के दौरान बीएसए इटावा ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्वीकार किया कि नगर क्षेत्र इटावा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिपिक ज्ञान सिंह की सेवानिवृत्ति के कारण तृतीय श्रेणी का पद रिक्त है। इस पर कोर्ट ने 16 मार्च 2023 को विभाग को आदेश दिया कि याची को उसी रिक्त पद पर नियुक्ति दी जाए। एकल पीठ के इस आदेश के खिलाफ बेसिक शिक्षा परिषद और विभाग ने स्पेशल अपील दाखिल की। डिवीजन बेंच ने विभाग की अपील को खारिज कर दिया और राज्य सरकार पर 10 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया। साथ ही कोर्ट ने फिर से निर्देश दिया कि स्वीकृत रिक्त पद पर ही याची को नियुक्ति दी जाए। याचिकर्ता के वकीलों ने रखी दलील याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद बीएसए ने अनूप कुमार को उस जगह (नगर क्षेत्र) नियुक्ति देने की बजाय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ताखा (इटावा) में ज्वॉइन करने का आदेश दिया। याची ने वहां कार्यभार भी संभाल लिया। इसके बाद याची ने आदेश के पूर्ण अनुपालन के लिए अवमानना याचिका की तो विभाग ने गत 25 अप्रैल को एक नया आदेश जारी कर दिया, जिसमें याची की ज्वॉइनिंग तारीख 25 अगस्त 2023 की बजाय एक जनवरी 2024 दिखा दी गई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया बीएसए इटावा का 25 अप्रैल का आदेश एकल पीठ और डिवीजन बेंच के आदेशों के बिल्कुल विपरीत है। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त समय मिलने और अवमानना याचिका के बावजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इटावा ने न्यायालय के आदेशों के अनुपालन पर कोई ध्यान नहीं दिया है। उनका यह आचरण प्रथम दृष्टया जानबूझकर की गई अवहेलना को दर्शाता है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के अधिवक्ता द्वारा जानकारी के लिए 10 दिन का समय मांगे जाने पर मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उस दिन बीएसए इटावा को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
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आदेश की अवहेलना पर इटावा के बीएसए तलब:हाईकोर्ट ने कहा- बताएं कि आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया