लखनऊ में लड्डू गोपाल प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया:आषाढ़ कृष्ण एकादशी पर चित्र-विचित्र ने भक्तिमय भजन सुनाया


लखनऊ में शुक्रवार को आषाढ़ कृष्ण एकादशी के अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में लड्डू गोपाल प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस भक्तिमय आयोजन में प्रसिद्ध भजन गायक चित्र-विचित्र ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर शाम तक पूरा सभागार राधा-कृष्ण के जयकारों और भजनों से गूंजता रहा। भजन संध्या की शुरुआत में चित्र-विचित्र ने ठाकुरजी के श्रृंगार का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि ठाकुरजी का श्रृंगार केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बुरी नजर से बचाने की एक प्राचीन परंपरा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से बाहरी आडंबरों को त्यागकर भगवान के वास्तविक स्वरूप का भावपूर्वक दर्शन करने का संदेश दिया। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भक्तिभाव में झूम उठे इसके उपरांत, उन्होंने ‘करुणामय कृपामय मेरे बांके बिहारी सरकार’, ‘श्री वृंदावन हम हैं अति ही दीन जन’ और ‘वृंदावन-वृंदावन गाऊं रे’ जैसे लोकप्रिय भजन प्रस्तुत किए। इन भजनों की धुन पर श्रद्धालु भक्तिभाव में झूम उठे। पूरा पंडाल ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजता रहा और भक्तों ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। उत्सव के संयोजक और लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा ने लड्डू गोपाल के लखनऊ आने से जुड़ा एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर में उनकी पत्नी ने विशेष प्रसाद की इच्छा व्यक्त की थी। तब मंदिर के पुजारी ने गर्भगृह से लड्डू गोपाल का विग्रह निकालकर उनकी गोद में रख दिया था। वर्षों तक घर में सेवा करने के बाद, चित्र-विचित्र की प्रेरणा से उसी दिव्य तिथि को प्रतिवर्ष प्राकट्योत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए कार्यक्रम के समापन पर लड्डू गोपाल को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद भव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अंत में सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस आयोजन में जितेंद्र चौहान, मनीष गुप्ता, अनिल वर्मानी, पवन मनोचा, कुश मिश्रा सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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