राम मंदिर दर्शन से पहले कांग्रेस नेता हाउस अरेस्ट:सरकार पर गंभीर आरोप, अयोध्या में संजय तिवारी बोले- धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला


उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में 30 जून को प्रस्तावित राम जन्मभूमि दर्शन कार्यक्रम से एक दिन पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन और विधिवत पूजन करने वाला था। पार्टी का आरोप है कि इस कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद किया जा रहा है। कांग्रेस नेता संजय तिवारी को घर पर रोके जाने का दावा इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य संजय तिवारी को सोमवार को थाना कुमारगंज पुलिस द्वारा उनके आवास पर ही रोक दिया गया। कांग्रेस का दावा है कि उन्हें अयोध्या जाने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई। इस घटना के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई और उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। सरकार पर लगाए राजनीतिक द्वेष के आरोप कांग्रेस नेता संजय तिवारी ने कहा कि जो सरकार स्वयं को रामभक्त बताती है, वही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को राम मंदिर में दर्शन-पूजन करने से रोक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। तिवारी ने कहा कि राम सभी के हैं और किसी भी राजनीतिक दल का उन पर एकाधिकार नहीं हो सकता। पार्टी ने कार्यक्रम जारी रखने की कही बात कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी शांतिपूर्ण ढंग से रामलला के दर्शन और पूजन का अपना कार्यक्रम जारी रखेगी। उनका दावा है कि यह धार्मिक आस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। हालांकि, इस मामले में पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से नजरबंद किए जाने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सरकार से कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग कांग्रेस ने सरकार से इस कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने से किसी को रोका जाना उचित नहीं है। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजर प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है।

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