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जौनपुर में 10 मोहर्रम के अवसर पर इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। ‘या हुसैन या हुसैन’ की सदाओं के बीच ताज़िया सुपुर्देखाक किया जा रहा है। सुबह से ही लोग अलम, ताबूत और ताज़िया का जुलूस लेकर सदरइमामबाड़ा पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें गंजे शहीदा में सुपुर्देखाक किया जा रहा है। यह परंपरा कर्बला के प्यासे शहीद हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में सदियों से निभाई जा रही है। इस दौरान अंजुमनें दर्द भरे नौहे पढ़कर वातावरण को ग़मगीन कर रही हैं। इतिहास के अनुसार, 10 मोहर्रम सन 60 हिजरी को यज़ीद ने इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को तीन दिनों तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया था। इसी शहादत की याद में मातमी अंजुमनों के युवकों ने जंजीर और छुरों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। मोहर्रम के जुलूस में दुलदुल, अलम और ताबूत का जुलूस भी निकाला गया।
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जौनपुर में 10 मोहर्रम पर ताजिया सुपुर्दे-खाक:इमाम हुसैन की शहादत में निकला मातमी जुलूस, जंजीर का मातम