मेरठ में पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई:ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधानों ने रखे सुझाव, आपत्तियां दर्ज


उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित अटल सभागार में जनसुनवाई आयोजित की। यह जनसुनवाई स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की वर्तमान स्थिति पर केंद्रित थी। जनसुनवाई में जनपद के ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और आम जनता ने भाग लिया। उन्होंने आयोग के समक्ष अपने सुझाव और राय लिखित एवं मौखिक रूप से प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व, आरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता और पंचायत स्तर पर भागीदारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। आयोग ने इस दौरान यह जानकारी भी जुटाई कि पंचायतों में ओबीसी वर्ग का राजनीतिक प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में है या नहीं। इसके साथ ही, आयोग ने राजनीतिक भागीदारी पर आर्थिक स्थिति, सामाजिक जागरूकता या अन्य वर्गों के प्रभाव का आकलन किया और पिछड़े वर्गों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर विचार किया। इस संबंध में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने सभी जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने सुझाव और आपत्तियां आयोग के समक्ष रखने का अनुरोध किया।मवाना के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि योगेश कुमार ने आयोग से जानना चाहा कि यदि पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 70 प्रतिशत से अधिक है, तो क्या उन्हें 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण मिल सकता है। मेरठ के जिला पंचायत सदस्य दीपक गून ने सुझाव दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर जैसी जातियों की आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। उन्होंने पाल, प्रजापति, सैनी, माली, कश्यप, जोगी, नाई, जलाहा सहित लगभग 15-20 ऐसी जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के प्रयास करने की बात कही, जिनका प्रतिनिधित्व वर्तमान में बहुत कम है। मेरठ के ब्लॉक प्रमुख कपिल मुखिया ने सुझाव दिया कि जिन ग्राम पंचायतों में एक हजार वोटर होते हैं, वहां भी एक प्रधान होता है, और जहां आठ हजार वोटर होते हैं, वहां भी एक ही ग्राम प्रधान बनता है। उन्होंने वोटों की संख्या निर्धारित करने की मांग की, ताकि यह तय हो सके कि एक ग्राम प्रधान कितनी वोटों पर बनेगा और इस प्रकार राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके।

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