2 Booked Over ₹100 Cr Turnover CGST Summons for Fake Firm

गोरखपुर में पंचर बनाने वाले के नाम पर फर्जी कंपनी खोलने और 100 करोड़ की टर्नओवर पर CGST की ओर से समन के मामले में एम्स थाने में FIR दर्ज कर लिया गया है।

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जानकारी देते हुए सीओ कैंट आभा सिंह ने बताया कि पीड़ित राज ने आरोप लगाया कि बहन की शादी के लिए गांव के ही अमित ने 30 हजार रुपए का लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से आधार और पैनकार्ड के साथ सिग्नेचर भी ले लिया। और अन्य व्यक्ति अनिल की मदद से कंपनी खोल दी। शिकायत पत्र के आधार पर पुलिस जांच में जुटी है।

जरुरी डॉक्युमेंट्स से हुआ फर्जीवाड़ा पीड़ित राज प्रजापति के अनुसार, साल 2024 में उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने गांव के ही एक व्यक्ति अमित गुप्ता से संपर्क किया। अमित ने 30 हजार रुपये का लोन दिलाने का झांसा देकर राज से उनके जरूरी दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड और पैन कार्ड) ले लिए।

इसके साथ ही आरोपी ने राज से सिग्नेचर करवाए और दो बार उनका वीडियो भी बनाया। पीड़ित को भनक तक नहीं लगी कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ‘मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक फर्जी कंपनी खड़ी कर दी गई और ‘यस बैंक’ (एस बैंक) में खाता भी खुलवा लिया गया।

सीओ कैंट आभा सिंह ने बताया कि पीड़ित ने तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सीओ कैंट आभा सिंह ने बताया कि पीड़ित ने तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

28 करोड़ का टैक्स बकाया, जांच में सच आया सामने फरवरी 2026 में वाराणसी सीजीएसटी विभाग को जांच के दौरान पता चला कि इस कंपनी ने करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और इस पर लगभग 28 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। बड़ा टर्नओवर दिखाने के बाद इस कंपनी को बंद भी कर दिया गया था।

मामले की कड़ियां जोड़ते हुए मार्च 2026 में जब सीजीएसटी की टीम जांच के लिए रामपुर बुजुर्ग स्थित राज प्रजापति के पते पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए।

करोड़ों की कंपनी का मालिक एक मामूली पंचर की दुकान चला रहा था। राज ने अधिकारियों को अपनी पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद टीम उस वक्त बिना कोई कार्रवाई किए लौट गई।

बनारस कमिश्नर ऑफिस में पेश होने का आदेश आया मामला तब और गंभीर हो गया जब बीती 27 मई को वाराणसी सीजीएसटी ऑफिस की तरफ से राज प्रजापति के नाम एक आधिकारिक समन जारी हुआ। इसमें उन्हें 29 मई को बनारस स्थित कमिश्नर ऑफिस में पेश होने का आदेश दिया गया था।

यह देखर राज घबरा गए। उन्होंने 30 मई को तुरंत एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। राज प्रजापति ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया है कि धोखे से उनके कागजातों का इस्तेमाल कर यह फर्जी कंपनी बनाई गई है।

उन्होंने इस धोखाधड़ी में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में अमित गुप्ता के साथ अनिल विश्वकर्मा की भी भूमिका रही है।

सीओ कैंट आभा सिंह ने बताया कि पीड़ित ने तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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