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लखनऊ से पिछले छह महीनों में लापता हुई 261 नाबालिग लड़कियों में से 34 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इस गंभीर स्थिति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को सभी लंबित मामलों की विस्तृत यथास्थिति रिपोर्ट व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची की बरामदगी से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद याचिकाकर्ता की बेटी को पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस आयुक्त द्वारा दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि पिछले छह महीनों में राजधानी में 261 नाबालिग लड़कियों के गायब होने या अपहरण के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 227 लड़कियों को बरामद कर लिया गया है, लेकिन 34 मामलों में पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिली है। न्यायालय को आश्वस्त किया गया कि शेष लड़कियों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। शपथपत्र के अनुसार, इन अनसुलझे मामलों में पश्चिमी जोन के छह, पूर्वी जोन के दस, उत्तरी जोन के छह, दक्षिणी जोन के सात और मध्य जोन के पांच मामले शामिल हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लापता बच्चों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि जांच में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की गई है। इसके साथ ही, न्यायालय ने संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेटों को इन मामलों की विवेचना की निगरानी करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित डीसीपी जांच की प्रगति से न्यायिक अधिकारियों को नियमित रूप से लिखित रूप में अवगत नहीं कराते हैं, तो इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना माना जाएगा।
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राजधानी से लापता 34 नाबालिग लड़कियों का नहीं लगा सुराग:लखनऊ हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, कार्रवाई के निर्देश