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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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चुनाव आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का तीसरा चरण शुरू कर दिया है।
निर्वाचन आयोग ने 14 मई को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 21 के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का आदेश दिया था। उसी प्रक्रिया के तहत अब ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से एन्यूमरेशन फेज शुरू हो गया है।
SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन करेंगे और फॉर्म जमा कराएंगे। आयोग ने कहा है कि 28 जून 2026 तक जिन लोगों के फॉर्म चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) को मिल जाएंगे, उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे।

पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे
आयोग ने कहा है कि SIR अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। 18 साल या उससे ज्यादा उम्र का हर भारतीय नागरिक, जो किसी कानून के तहत अयोग्य घोषित नहीं है, वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का हकदार है।
BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे
- एन्यूमरेशन फेज के दौरान BLO हर घर तक पहुंचेंगे। वे मतदाताओं को फॉर्म देंगे, भरे हुए फॉर्म जमा करेंगे और जानकारी का सत्यापन करेंगे। मतदाता चाहें तो फॉर्म BLO को दे सकते हैं या ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं।
- आयोग ने BLO को निर्देश दिया है कि वे घर-घर सर्वे के दौरान कम से कम 30 खाली Form-6 और घोषणा पत्र साथ रखें। इससे ऐसे लोग, जिनका नाम अभी वोटर लिस्ट में नहीं है, नए मतदाता के तौर पर आवेदन कर सकेंगे।
- जो लोग 28 जून तक एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर पाएंगे, वे बाद में दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान Form-6 और घोषणा पत्र के साथ आवेदन कर सकेंगे।

राजनीतिक दल भी जुटाएंगे आवेदन
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बूथ लेवल एजेंट (BLA) को भी फॉर्म एकत्र करने की अनुमति दी है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के BLA रोजाना 50 तक फॉर्म लोगों से लेकर ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले BLO को सौंप सकेंगे।
आयोग का कहना है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त BLA भी नियुक्त कर सकते हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया तेजी और सुचारु तरीके से पूरी हो सके।
आयोग ने सहयोग की अपील की
चुनाव आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से इस प्रक्रिया में भाग लेने और घर-घर पहुंचने वाले चुनाव अधिकारियों को सहयोग देने की अपील की है। आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाया जा रहा है।
14 मई: 19 राज्य-UT में SIR का ऐलान, यहां 37 करोड़ वोटर्स
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। पूरी खबर पढ़ें…
करीब 4 लाख BLO, 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट तैनात होंगे
चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे।

SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज के तहत, बिहार में सबसे पहले SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ।
चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए।

SIR: भारत में 21 साल बाद हो रहा वोटर लिस्ट का रिविजन
SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट की पूरी तरह से जांच और अपडेट किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ पात्र और सही मतदाताओं के नाम हों।
भारत में SIR करीब 21 साल बाद हो रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इससे पहले देशभर में ऐसा बड़ा अभियान 2002 से 2004 के बीच चला था। चुनाव आयोग ने बताया था कि देश में SIR की प्रक्रिया आठवीं बार हो रही है।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR अवैध नहीं: चुनाव आयोग शर्तों के साथ नागरिकता जांच सकता है; SIR में 13 राज्य-UT में 7.41 करोड़ नाम कटे

सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा था कि SIR मनमाना नहीं है और चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। पूरी खबर पढ़ें…
