सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने रणदीप सुरजेवाला से मुलाकात की। मीटिंग से पहले मीडिया से बात करते हुए परगट सिंह।
दिल्ली में हाईकमान के साथ मुलाकात के बाद पंजाब कांग्रेस का बागी गुट बैकफुट पर आ गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट को हाईकमान ने चेतावनी दी है कि बगावत की तो एक्शन होगा। साथ ही इन्हें दोटूक बोला गया है कि पंजाब प्रधान पद पर राजा वड़िंग ही रहे
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इस चेतावनी के बाद बागी गुट के सुर बदल गए। करीब 3 घंटे की मीटिंग के बाद बाहर आकर विधायक राणा गुरजीत ने कहा- हमारी कोई लड़ाई नहीं है। अंदर की बात बाहर नहीं करेंगे। सब ठीक करके ही बाहर आ रहे हैं।
वहीं, गुट के मुखिया चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि हमें यहां बुलाया गया था। हमने अपना पक्ष रखा। यह क्लीयर है कि हम पार्टी के साथ हैं। हम राहुल गांधी के साथ हैं। खड़गे के साथ हैं। हम सिर्फ पार्टी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हमने हाईकमान के सामने अपना पक्ष रखा है। जो फैसला हाईकमान का होगा उसे मानेंगे।
चन्नी ने कहा कि हम पार्टी के खिलाफ नहीं हैं, पार्टी के साथ चलेंगे। अंत में चन्नी ने कहा- ऑल इज वेल। पंजाब में जो बैठक बुलाई थी, वह बघेल से मिलने के लिए बुलाया थी। बैठक में परगट सिंह और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद रहे।
पंजाब कांग्रेस के बागी गुट की हाईकमान के साथ यह पहली मीटिंग थी। इससे पहले चन्नी और रंधावा ने रणदीप सुरजेवाला से उनके निवास पर मुलाकात की।
वहीं, राहुल गांधी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को दिल्ली से छत्तीसगढ़ लौटा दिया और चन्नी गुट से दूरी बना ली। राहुल गांधी चरणजीत चन्नी की प्रेशर टेक्टिस से बेहद खफा हैं। इसलिए, उन्होंने चन्नी को अभी तक मिलने का वक्त नहीं दिया। राहुल ने यह भी क्लियर कर दिया था कि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा।
राहुल गांधी अब अगले एक-दो दिनों में पंजाब कांग्रेस पर अहम फैसला सुनाकर चन्नी गुटा को झटका दे सकते हैं। उधर, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजा वड़िंग ने ग्राउंड लेवल पर कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंगों का दौर शुरू कर दिया है।

चन्नी से राहुल की नाराजगी के 4 बड़े कारण…
- हाईकमान के फैसले को नकारना: कांग्रेस हाईकमान ने इलेक्शन के लिए जो कमेटियां घोषित की थीं, उसकी मंजूरी राहुल गांधी ने दी थी। चरणजीत सिंह चन्नी व उनके खेमे ने हाईकमान की लिस्ट को सिरे से नकार दिया और कहा कि वे इस लिस्ट को नहीं मानते। यहां तक कि वे भूपेश बघेल की मीटिंगों में भी शामिल नहीं हुए। राहुल गांधी इस बात से भी नाराज हैं कि चन्नी ने हाईकमान के फैसले को सिरे से नकारा है।
- हाईकमान से बात करने की जिद: चरणजीत सिंह चन्नी व उनके गुट ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। चन्नी गुट हाईकमान से बात करने की जिद पर अड़ा रहा। चन्नी ने एक तो हाईकमान के फैसले को नकारा, दूसरी तरफ हाईकमान से मिलने की बात की। चन्नी गुट के अड़ियल रवैये से भी राहुल गांधी नाराज हैं। सूत्र बताते हैं कि इसी वजह से राहुल गांधी चन्नी को मिलने का समय भी नहीं दे रहे हैं।
- प्रदेश अध्यक्ष की खिलाफत: चरणजीत सिंह चन्नी व उनके गुट ने साफ कर दिया कि वे राजा वड़िंग की प्रधानगी में चुनाव में नहीं जाएंगे। राजा वड़िंग की प्रधानगी को कंटीन्यु रखने का फैसला हाईकमान का है। इसके बावजूद चन्नी गुट ने राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोला है। राहुल गांधी इसे सीधे तौर पर पार्टी में अनुशासनहीनता मान रहे हैं।
- चन्नी की प्रेशर टेक्टिस: पंजाब मामले को लेकर दिल्ली में केसी वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ से भूपेश बघेल और पंजाब से प्रताप सिंह बाजवा को दिल्ली बुलाया। वेणुगोपाल ने दोनों नेताओं के साथ मीटिंग की। इधर, चन्नी गुट ने राहुल गांधी के विदेश से लौटते ही सारा पंजाब चन्नी दे नाल मुहिम शुरू कर सोशल मीडिया पर पोस्ट डालनी शुरू कर दी। कांग्रेस हाईकमान इसे प्रेशर टेक्टिस का हिस्सा मान रहा है और इसी वजह से शीर्ष नेतृत्व चन्नी खेमे से नाराज है। भूपेश बघेल ने भी अपनी रिपोर्ट में यही बात कही है कि जब पंजाब में वब मीटिंग कर रहे थे तो चन्नी खेमा उनके पेरेलल अपनी मीटिंग्स कर रहे थे।

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कांग्रेस हाईकमान चन्नी से नाराज, राहुल-खड़गे मिलना नहीं चाहते; बगावत पर कभी भी बड़ा फैसला संभव

विधानसभा चुनाव से करीब 7 महीने पहले पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान को लेकर हाईकमान में भी मतभेद हो गए हैं। कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक इस मामले में राहुल गांधी की टीम और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अलग-अलग राय है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल व पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल नहीं चाहते थे कि राजा वड़िंग को प्रधान की कुर्सी से हटाया जाए। पढ़ें पूरी खबर…