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शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने सहारनपुर पहुंचकर जहां शहर के सांप्रदायिक सौहार्द की सराहना की, वहीं भारत की विदेश नीति, इजराइल से संबंध, अमेरिका के प्रभाव, चाबहार पोर्ट, महंगाई, धर्म की राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भारत के कई फैसले अमेरिका और इजराइल के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जिसका नुकसान देश की जनता को उठाना पड़ रहा है। मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा कि सहारनपुर का माहौल बहुत अच्छा है। यहां शिया-सुन्नी संबंध भी बेहतर हैं और खासकर हिंदू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यहां बड़ी तादाद में हिंदू और मुसलमान रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद आपसी मेलमिलाप और सौहार्द का वातावरण बना हुआ है। इसी वजह से उन्हें सहारनपुर पसंद आया। अमेरिका-इजराइल और ईरान मुद्दे पर सरकार से सवाल अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और भारत की विदेश नीति पर बोलते हुए मौलाना ने कहा कि देश की जनता भी हैरान है कि भारत को अमेरिका और इजराइल से आखिर क्या मिल रहा है, जिसके कारण ईरान और रूस जैसे देशों से दूरी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि न तो भारत को इजराइल से तेल और गैस मिलती है और न ही वहां भारतीयों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता है। उनका दावा था कि इजराइल का अस्तित्व पूरी तरह अमेरिका पर टिका हुआ है। वहां इस्तेमाल होने वाले हथियार भी अमेरिका के हैं और भारत भी कई तरह के हथियार खुद बना रहा है। ऐसे में भारत की इजराइल से इतनी नजदीकी का मकसद क्या है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। मौलाना ने कहा कि इजराइल से केवल मुसलमानों के प्रति दुश्मनी की भावना ही मिल रही है, जबकि मुस्लिम देशों से भारत को तेल, गैस, यूरिया और रोजगार के अवसर मिलते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इजराइल से ऐसा क्या लाभ मिल रहा है जो भारत उसके साथ इतना करीबी रिश्ता बनाए हुए है। जनता सरकार से पूछे सवाल उन्होंने कहा कि वह देश की जनता और अपने हिंदुस्तानी भाइयों से अपील करना चाहते हैं कि वे भारत सरकार से पूछें कि इजराइल से ऐसा क्या मिल रहा है जिसके लिए ईरान और रूस जैसे पुराने सहयोगियों को पीछे छोड़ दिया गया। उनका दावा था कि देश में तेल और गैस की समस्या तथा बढ़ती महंगाई के पीछे भी यही नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के दबाव में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी सरकार से जवाब मांगना चाहिए। ट्रंप और एप्स्टीन फाइल्स का किया जिक्र मौलाना ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए दावा किया कि ट्रंप भी दबाव में हैं क्योंकि उनका नाम एप्स्टीन फाइल्स में आया है। उन्होंने कहा कि इसी कारण अमेरिका को इजराइल की बात माननी पड़ती है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत के नेता किस दबाव में हैं, यह भी देश को बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां तक कि इजराइल को फादरलैंड तक कहा गया, जो कई सवाल खड़े करता है। नेतन्याहू पर हमला, पीएम मोदी का भी किया जिक्र मौलाना ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को “इंटरनेशनल क्रिमिनल” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने उन्हें मानवता का दुश्मन करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति से सम्मान लेकर आए हैं। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि यदि कोई दाऊद इब्राहिम से सम्मान लेकर आए तो लोग सवाल उठाएंगे, जबकि उनके अनुसार नेतन्याहू पर उससे भी गंभीर आरोप लगे हुए हैं। देश की परेशानी की वजह इजराइल मौलाना ने कहा कि देश में जो भी परेशानियां हैं, उनकी एक बड़ी वजह इजराइल के प्रति झुकाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिका और इजराइल के निर्देशों का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से कहा कि चाबहार परियोजना से दूरी बनाई जाए। इस परियोजना में भारत के लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो जनता के पैसे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा नेताओं ने अपनी जेब से लगाया था। चाबहार पोर्ट छोड़ने पर उठाए सवाल मौलाना ने कहा कि यदि भारत के पास चाबहार परियोजना का पूरा लाभ होता तो देश में तेल और गैस की कमी नहीं होती। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर चाबहार को क्यों छोड़ा गया और जनता के 10 हजार करोड़ रुपये की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल नहीं चाहते थे कि भारत इस परियोजना को आगे बढ़ाए, इसलिए भारत को पीछे हटना पड़ा। उनके अनुसार इससे यह संदेश जाता है कि भारत के फैसले अमेरिका और इजराइल के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। जनता को धोखा दिया जा रहा मौलाना ने कहा कि इन नीतियों से भारत की जनता का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को गुमराह किया जा रहा है और देश में अमेरिका-इजराइल का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत के नेताओं पर कोई ऐसा दबाव है जिसकी वजह से वे हर निर्देश मानने को मजबूर हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। धर्म की राजनीति का किया विरोध मौलाना ने कहा कि धर्म का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए क्योंकि इसका नुकसान हमेशा समाज को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल करना गलत है और वह इसके खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम को लेकर यदि किसी के मन में गलत धारणाएं हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए। चार बीवियों वाले दावे को बताया गलत मौलाना ने उन लोगों को चुनौती दी जो दावा करते हैं कि मुसलमान चार-चार शादियां करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में कोई ऐसा व्यक्ति दिखा दिया जाए जिसकी चार पत्नियां हों। उन्होंने कहा कि एक पत्नी की जिम्मेदारी निभाना ही मुश्किल होता है। उनके अनुसार कट्टरपंथी लोग हिंदू समाज को भ्रमित करते हैं और ऐसे मुद्दों के जरिए लोगों को गुमराह करते हैं। फेल पार्टियां करती है धर्म का इस्तेमाल मौलाना ने कहा कि धर्म का इस्तेमाल वही राजनीतिक दल करते हैं जो जनता के लिए जमीन पर काम करने में विफल हो चुके होते हैं। उन्होंने कहा कि जो दल विकास और जनहित के मुद्दों पर काम करते हैं, उन्हें धर्म का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। 2027 विधानसभा चुनाव पर दी सलाह यूपी के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर मौलाना ने कहा कि जनता को उन राजनीतिक दलों से दूर रहना चाहिए जो धर्म के नाम पर चुनाव लड़ते हैं या दंगे फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को ऐसे उम्मीदवारों और दलों को चुनना चाहिए जो जमीन पर उतरकर जनता के लिए काम करते हों और विकास को प्राथमिकता देते हों।
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कल्बे जव्वाद बोले-भारत अमेरिका-इजराइल के इशारे पर चल रहा:सहारनपुर में कहा-इजराइल से मुसलमानों के प्रति मिल रही दुश्मनी की भावना, सरकार से जनता पूछे सवाल