सपा विधायक सचिन यादव का भाजपा पर हमला:बोले- विधानसभा सत्र छोटा कर दबाई जा रही आवाज; बेरोजगारी-पत्रकार सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल


फिरोजाबाद में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जसराना विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक इंजीनियर सचिन यादव ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतर सकी है और हर वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। भास्कर से बातचीत में विधायक सचिन यादव ने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास” के नारे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन मौजूदा हालात में जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जनता की समस्याओं से जुड़े करीब 500 शिकायती पत्र मौजूद हैं। सपा विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा सत्र को छोटा कर विपक्ष की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे हर सत्र में जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। पत्रकारों की सुरक्षा और सुविधाओं का उठाया मुद्दा सचिन यादव ने पत्रकारों की सुरक्षा और सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज पत्रकार दबाव में काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें बीमा और अन्य मूलभूत सुविधाएं देने में असफल रही है। बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा युवाओं की बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा बताते हुए विधायक ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था रोजगार देने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने सरकार से ऐसी तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की, जिससे पढ़ाई पूरी होने के बाद युवाओं को रोजगार की गारंटी मिल सके। सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की भर्ती से बच रही है और छात्र संख्या के गलत आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। मंगलामुखी समाज और संविदाकर्मियों का भी उठाया मुद्दा विधायक ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में मंगलामुखी समाज की समस्याओं को भी उठाया है। उनके मुताबिक प्रदेश में यह समाज उपेक्षा का शिकार है और उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है। संविदा कर्मचारियों की स्थिति को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कम वेतन में अधिक काम लेने से संविदाकर्मी मानसिक दबाव में हैं और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। चुनाव से पहले तेज हुई सियासत राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल बनने से पहले विपक्षी नेता अब जनता से जुड़े मुद्दों को अधिक आक्रामक तरीके से उठाने लगे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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