![]()
बागपत में ऋण वसूली से जुड़े एक मामले में नया विवाद सामने आया है। बुधवार को एक शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया है कि उसके खिलाफ गलत और भ्रामक तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि संबंधित बैंक का लगभग 2 लाख 32 हजार 600 रुपये के बकाया ऋण का मामला डीआरटी (ऋण वसूली न्यायाधिकरण) में विचाराधीन है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर और गलत जानकारी प्रस्तुत कर गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है, जबकि ऋण से संबंधित मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और उसका अंतिम निस्तारण नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि जब तक मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गलत तथ्यों के आधार पर की गई कार्रवाई उनके अधिकारों का हनन है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों और बैंक प्रबंधन की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। जिलाधिकारी कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में न्यायोचित कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने जांच कर करावाई आश्ववन दिया
Source link
ऋण वसूली मामले में गलत वारंट जारी होने का आरोप:शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की