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अपर जिला जज 7 निशा श्रीवास्तव ने फर्जी डिग्री मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अभियोजन ने तर्क रखा था कि अग्रिम जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्य नष्ट करेंगे। इससे विवेचना प्रभावित होगी। यह गंभीर प्रकृति का अपराध है। फर्जी डिग्री मार्कशीट मामले में सिक्किम निवासी मयंक भारद्वाज ने अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र देते हुए कहा कि न उसने कोई फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किया है और न किसी को दिया है। सह आरोपी के बयान के आधार पर उसे फंसा गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद त्रिपाठी ने कहा कि मयंक भारद्वाज से इस मामले के सगरना शैलेंद्र कुमार की पहले मोबाइल से बात हुई थी। इसके बाद वह गाजियाबाद मिलने आया था। मयंक भारद्वाज ने उसे एशियन इंटरनेशनल विश्वविद्यालय मणिपुर की मार्कशीट कोरियर से भेजी थी। आरोपी शैलेंद्र कुमार व मयंक भारद्वाज के बीच एक फरवरी 2024 से 13 फरवरी 2026 के बीच 625 इनकमिंग व 662 आउटगोइंग काल पर वार्ता हुई थी। बरामद अंक पत्र जांच में फर्जी निकले थे। इस गिरोह के एजेंट देश भर में फैले हैं। इस पर कोर्ट ने अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
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फर्जी डिग्री मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज:ADGC ने कहा- 2 साल में सरगना से 662 बार फोन पर बात हुई