अयोध्या में श्रद्धालु घटे, होटल ऑक्यूपेंसी 25% ही बची:राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद हालात बदले, दुकानदारों की कमाई घटी


सुबह के दस बजे हैं… रामपथ पर स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार से रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालु आगे बढ़ रहे हैं। कोई रामधुन गा रहा है, तो कोई ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर रहा है। इस कतार में लगकर साफ हो जाता है कि रामलला के प्रति आस्था अटूट और अटल है, लेकिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोगों द्वारा चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद यहां बहुत कुछ बदल गया है। रामपथ पर चंदन, माला की दुकान चलाने वाले एक युवक कहते हैं- श्रद्धालुओं की संख्या पहले की तुलना में 25% ही है। यहीं प्रसाद का ठेला लगाने वाले एक युवक ने बताया कि 10 दिन पहले तक रोज 4-5 हजार रु. तक बिक्री कर लेते थे। अब एक हजार भी मुश्किल है। नया घाट पर फूल-माला बेचने सूर्य प्रकाश की भी यही पीड़ा है, जो दिनभर में 1000 से 1500 रु. तक बिक्री करते थे। अब बमुश्किल 500 रु. कमा पाते हैं।’ ई-रिक्शा चलाने वाले अजय कहते हैं, अब रिक्शे का किराया और अपना खर्च भी नहीं निकल रहा है। सुबह नाश्ते के वक्त रामपथ पर एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट की सभी टेबल खाली मिलीं। मैनेजर ने बताया कि दस दिन से यही हाल है। वो इसके लिए चढ़ावा चोरी के साथ ही स्कूल खुलने और बारिश को भी जिम्मेदार बताते हैं। हालांकि ज्यादातर स्थानीय दुकानदारों, ऑटो, ई-रिक्शा और होटल वालों की मानें तो श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम हो गई है और चढ़ावा विवाद इसका बड़ा कारण है। पहले औसतन रोज एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु आते थे, वो आंकड़ा 60-70 हजार पर आ गया है। गुजरात से आए युवा सुमित कहते हैं, ‘मैं दूसरी बार आया हूं। तब दर्शन में चार घंटे लगे थे, इस बार एक घंटे में दर्शन हो गया।’ अयोध्या होटल्स एसो. के प्रवक्ता अरुण अग्रवाल कहते हैं, ‘अभी मिड-सेगमेंट होटलों की ऑक्यूपेंसी 25% बची है। इन्हीं के ग्राहक सबसे ज्यादा थे। अयोध्या के आसपास करीब 100 नए होटल बन रहे हैं। अगर धार्मिक पर्यटन की रफ्तार जल्द न बढ़ी तो निवेश पर भी असर पड़ेगा।’ एक ट्रैवल एजेंसी के संचालक ने बताया कि ज्यादातर श्रद्धालु आसपास के हैं, जिन्हें न होटल की जरूरत है न टैक्सी की। संतों का मत; कोई बोला- नया ट्रस्ट बनाएं, तो किसी ने इसे आस्था तोड़ने की साजिश बताया सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास के महंत आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण कहते हैं कि यह व्यवस्था की गलती है, संस्था की नहीं। इसकी आड़ में आस्था तोड़ने की सियासी साजिश चल रही है, लेकिन यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। इसका पूरा सच जल्द सामने आ जाएगा। मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा- कुछ छोटे कर्मचारियों की चूक है, उन पर कार्रवाई हुई है। इसमें चंपत राय की कोई गलती नहीं है। हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे भंग करने और अयोध्या के साधु-संतों का नया ट्रस्ट बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ी तो हम इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। दंतधावन कुंड मंदिर के महंत विवेक आचारी ने ट्रस्ट में शंकराचार्यों और पीठाधीश्वरों को शामिल करने की बात कही। महंत जन्मेजय शरण ने अयोध्या के संतों को ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। यूपी में 9 महीने बाद चुनाव… भाजपा का पूरा फोकस डैमेज कंट्रोल पर राजनीतिक परीक्षा यह विवाद चढ़ावा चोरी या जांच तक सीमित नहीं रहा। राम मंदिर भाजपा और संघ के लंबे वैचारिक आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है। उसी मंदिर के ट्रस्ट पर सवाल उठे, तो विपक्ष को भाजपा को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है। यूपी चुनाव में करीब नौ महीने बाकी हैं, इसलिए विवाद भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। डैमेज कंट्रोल शुरुआती चुप्पी साधने के बाद भाजपा और संघ इसका जवाब दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि एसआईटी जांच जारी है, दोषियों पर कार्रवाई हो चुकी है और ट्रस्ट में बड़े सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। रणनीतिक विराम बंगाल के नतीजों के बाद जनगणना के चलते राजनीतिक हलकों में यूपी में समयपूर्व चुनावों की चर्चा थी। पर, ट्रस्ट विवाद के बाद भाजपा अभी इस विकल्प पर आगे बढ़ने के पक्ष में नहीं है। बिना इस राजनीतिक शोर के थमे चुनाव से नुकसान का डर है। घमासान सीएम योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी है। वहीं, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, यह आस्था का मामला है। जांच में लीपापोती नहीं होने दी जाएगी। सपा इसे संसद के मानसून सत्र में भी उठाएगी।

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