Kanpur School Politics Affect Kids Studies

दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर3 मिनट पहले

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कानपुर में परमट स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल को नेताओं ने अपनी सियासी जंग का अखाड़ा बना दिया है। नेताओं की इस लड़ाई में अब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विवाद के 3 दिनों के बाद स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है।

टीचर छात्रों को घरों से बुलाकर ला रहे हैं। आखिर इस समस्या का क्या समाधान है, इससे बच्चों पर क्या असर पड़ा है। इसको जानने के लिए दैनिक भास्कर ने स्कूल के प्रिंसिपल और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

3 तस्वीरें देखिए…

स्कूल शिलान्यास विवाद के बाद सपा-भाजपा नेता में विवाद हो गया, जिसके बाद BJP नेताओं ने सपा विधायक को चप्पल दिखाई।

स्कूल शिलान्यास विवाद के बाद सपा-भाजपा नेता में विवाद हो गया, जिसके बाद BJP नेताओं ने सपा विधायक को चप्पल दिखाई।

स्कूल शिलान्यास विवाद के बाद सपा MLA अमिताभ बाजपेयी को सैकड़ों पुलिस कर्मियों को हाउस अरेस्ट किया गया।

स्कूल शिलान्यास विवाद के बाद सपा MLA अमिताभ बाजपेयी को सैकड़ों पुलिस कर्मियों को हाउस अरेस्ट किया गया।

सपा और भाजपा नेताओं के विवाद के बाद स्कूल में पुलिस तैनात की गई है।

सपा और भाजपा नेताओं के विवाद के बाद स्कूल में पुलिस तैनात की गई है।

नेताओं की लड़ाई के बाद घर से बुलाकर ला रहे बच्चे प्राथमिक विद्यालय परमट में कुल 42 छात्र पढ़ने के लिए आते है। बुधवार से भाजपा और समाजवादी पार्टी के नताओं के बवाल के बाद, इस स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है। इस स्कूल में शुक्रवार को सिर्फ 28 बच्चे पढ़ने के लिए आए हुए थे।

2017 से तैनात प्रधानाचार्य नवीन त्रिपाठी बेंच डालकर बाहर बैठे मिले। हमने उनसे बात की- वे बताते है, कुछ दिन पहले शिलान्यास को लेकर जो विवाद हुआ उसके बाद यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, पुलिस को देखकर बच्चे बुरी तरह घबरा गए है। साथ ही बच्चों के परिवार वाले भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। हालात ये हैं, अब शिक्षकों को खुद उनके घरों पर जाकर माता-पिता को समझाना पड़ रहा है, तब कहीं जाकर कुछ बच्चे स्कूल आ रहे हैं। इस पूरी घटना का बच्चों के ऊपर असर पड़ रहा है।

प्रिंसिपल नवीन त्रिपाठी ने बताया पुलिस को देखकर बच्चे बुरी तरह घबरा गए है।

प्रिंसिपल नवीन त्रिपाठी ने बताया पुलिस को देखकर बच्चे बुरी तरह घबरा गए है।

पहले तोड़ दिया परिसर अब 3 कमरों में 42 बच्चे बैठ रहे यह स्कूल आसपास की करीब 10,000 की आबादी के बीच इकलौता सरकारी स्कूल बना हुआ है। इसके बाद दूसरा स्कूल 2 किमी दूर सरसैया घाट पर बना हुआ है। प्रधानाचार्य नवीन त्रिपाठी आगे बताते है, स्कूल परिसर का लगभग क्षेत्रफल 1000 वर्ग गज का है, लेकिन वर्तमान में जो कक्षाएं चल रही हैं, वे महज लगभग 200 वर्ग गज में ही संचालित हो रही हैं। इससे बच्चों को मानसिक शिक्षा जैसे कि खेलकूद आदि की क्लासें प्रभावित हो रही हैं।

2 कमरों में बैठ रहे 5 क्लासों के बच्चे कक्षा 1 से 5 तक के इस स्कूल में कुल 5 शिक्षक जिनमें 2 शिक्षामित्र बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। स्कूल में अभी सिर्फ तीन ही कमरे बने हैं, जिनमें से एक प्रधानाचार्य का कक्ष है और बाकी दो कमरों में 1 से 5 तक के बच्चों की क्लास चल रही है। स्कूल के ठीक बगल में जो पुरानी बिल्डिंग बनी हुई थी, उसे महज 20 दिन पहले ही ढहाया गया है।

स्कूल परिसर में यही पर स्मार्ट क्लासे बनानी थी, जो अब टल गई हैं

स्कूल परिसर में यही पर स्मार्ट क्लासे बनानी थी, जो अब टल गई हैं

स्मार्ट क्लास और मॉडल स्कूल, छात्रों के लिए बना सपना विवादित शिलान्यास के पीछे का असल मकसद स्कूल की सूरत बदलना था। जब हमने प्रधानाचार्य से बात की कि मॉडल स्कूल बनने से बच्चों को क्या फायदा होगा, तो उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि, इससे बच्चों को प्राइवेट स्कूलों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। बच्चे चाक-डस्टर और ब्लैक बोर्ड के बजाय टीवी स्क्रीन यानी डिजिटल बोर्ड पर पढ़ेंगे। इसके जरिए जटिल विषयों, जैसे विज्ञान और गणित को एनीमेशन, वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से आसानी से समझाया जा सकेगा। इससे बच्चों का पढ़ाई को लेकर अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

समझिए एनओसी (NOC) का पूरा गणित इस पूरे घमासान पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सुरजीत कुमार सिंह से बात की, तो उन्होंने विवाद की वजह के बारे में बताया। वो कहते है, 1972 में बेसिक शिक्षा परिषद का गठन हुआ था, उस हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब 1980 में इस स्कूल की स्थापना हुई थी। अब जब विधायक और सांसद दोनों की निधि से 25-25 लाख रुपये (कुल 50 लाख) की लागत से स्कूल का निर्माण कराया जाएगा, तो जाहिर सी बात है,कि यह एक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित होगा।

उन्होंने बताया कि स्कूल के काम को लेकर एनओसी दोनों ही पक्षों को जारी की गई है और दोनों के काम अलग-अलग हैं। सपा विधायक अमिताभ बाजपेई को साल 2025 में मॉडल स्कूल के तीन कमरों के निर्माण को लेकर एनओसी जारी की गई थी, वहीं सांसद रमेश अवस्थी को जनवरी 2026 के महीने में स्कूल की बाउंड्री वॉल, मुख्य गेट और एक स्मार्ट क्लास बनाने के लिए एनओसी दी गई है। एनओसी जारी करने के प्रावधान के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि पीडीडीआरडीए से पत्र प्राप्त होने के बाद ही स्कूल की एनओसी व अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

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कानपुर में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने शुक्रवार को मीडिया कर्मियों के सामने कुर्ता निकालकर फेंक दिया। उन्होंने कहा- मैं संकल्प लेता हूं कि जब तक स्कूल नहीं बनेगा, तब तक कुर्ता और चप्पल नहीं पहनूंगा। उन्होंने डमरू भी बजाया और कहा- बच्चों का सपना अधूरा है, बाबा भोलेनाथ उसे पूरा करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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