नियमों को डुबाकर तैराकी कर रहे मेरठवासी:100 से अधिक स्वीमिंग पूलों में से क्षेत्रीय खेल कार्यालय पर सिर्फ एक का पंजीकरण


मेरठ जिले में शहर से देहात तक स्वीमिंग पूल की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही मानक पूरे न होने के कारण हर साल दनमें हादसे भी होते रहते हैं, इसके बाद भी जिला प्रशासन इस और कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा है। एक तो इन स्वीमिंग पूल में सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन नहीं है। उधर सिर्फ एक स्वीमिंग पूल ही रजिस्ट्रर्ड तरीके से संचालित हो रहा है। जिला खेल कार्यालय में हर साल स्वीमिंग पूल के नवीनीकरण का भी नियम है। इसके लिए प्रतिवर्ष 15000 रूपये का शुल्क और मानक पूरे करने होते हैं। लेकिन इस नियम का कोई पालन नहीं कर रहा। ऐसे स्वीमिंग पूलों में सुरक्षा के मानक भी पूरे नहीं होते हैं। जिस कारण हादसा भी हो सकता है। नए सत्र 2026-27 के लिए जिले भर से सिर्फ एक पंजीकरण हुआ है। प्रशासन की ढिलाई के चलते शहर में ऐसे पूलों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। इसके अलावा लगभग 6 से 7 पूल संचालकों ने इसके लिए आवदेन किया है। यह जानकारी क्षेत्रीय क्रीडा अधिकारी जितेंद्र यादव द्वारा दी गई।
स्वीमिंग पूल के लिए कुछ मुख्य दिशा-निर्देश
– फिल्ट्रेशन प्लांट रहना चाहिए
– जीवन रक्षक की मौजूदगी अनिवार्य
– नजदीकी अस्पताल व पुलिस स्टेशन का मोबाइल नंबर
– पूल की गहराई के निशान होने चाहिए
– महिला – पुरुष दोनों के लिए अलग शौचालय की सुविधा
– पूल का अधिकतम आकार 25×50 मीटर और न्यूनतम 6×10 मीटर होना चाहिए। – लर्निंग पूल की गहराई 4.5 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। हादसे के बाद भी सख्त नहीं प्रशासन लिसाड़ीगेट क्षेत्र में बीते रविवार को जनकपुरी के वाटरलैंड स्विमिंग पूल एक 12 वर्षीय बालक की डूबने से मौत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने नगरीय क्षेत्र के स्विमिंग पूलों का निरीक्षण किया और लिसाड़ी गेट स्थित एक पूल को सील कर दिया। हालांकि कार्रवाई सिर्फ यहीं तक सिमट गई। जिले में 100 से अधिक स्विमिंग पूल संचालित होने का अनुमान है, हालांकि प्रशासन या संबंधित विभागों के पास इनकी सही संख्या और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) संबंधी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं। आमतौर पर हादसों के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती है और नियमों की याद आती है। कुछ दिनों की सख्ती के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। पूल संचालक भी चार महीने के सीजन में जांच के कारण एक भी दिन का नुकसान नहीं चाहते। स्विमिंग पूलों के संचालन के लिए सख्त नियमावली है। इसके तहत पूल को खेल निदेशालय से अनुमति प्राप्त होनी चाहिए। कोच राष्ट्रीय या राज्य स्तर का खिलाड़ी होना चाहिए, और लाइफ गार्ड साई द्वारा प्रमाणित या फौज /पीएसी से जुड़ा होना अनिवार्य है।

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