वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सम्मानित किए गौप्रहरी:गौमाता के संरक्षण प्रतियोगिता में कक्षा 3 से 12 तक छात्र हुए थे शामिल


ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार की शाम श्रीविद्यामठ में आयोजित समारोह में गौप्रहरी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया। उन्हें स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया। उनके कार्यों और प्रयासों की सराहना की। गौ माता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता का दर्जा दिलाने सहित भारत से गोकशी बंद कराकर गौमाता के संरक्षण के लिए श्रीगुरुकुलम न्यास ने गौ प्रहरी प्रतियोगिता कराई थी। वाराणसी के विद्यालयों में इसका आयोजन किया गया था। कक्षा 3 से लेकर कक्षा 12 तक के छात्र एवं छात्राएं शामिल हुए थे। शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता को पशु नही बल्कि धर्म,संस्कृति और सृष्टि की पोषिका व आधारशिला के रूप में देखा गया है। वैदिक परम्परा से लेकर आधुनिक समय तक गौमाता भारतीय समाज,अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्र रही हैं। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के मूल में गौमाता ही रही हैं। गौमाता की महिमा केवल धार्मिक ग्रन्थों तक ही सीमित नहीं है अपितु उनका संरक्षण सम्पूर्ण मानवता और सृष्टि के कल्याण से जुड़ा है। सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए तमाम संस्थाओं का आह्वान किया। श्री गुरुकुलम के अध्यक्ष अभय शंकर तिवारी, अनिल कुमार विक्रम त्रिवेदी संजय पाण्डेय राघव दास जी, परमात्मानन्द महाराज, त्रिभुवन, बृजेश सेठ, अभिषेक सिंह, सोनू मौर्या, श्रेया श्रीवास्तव, विक्रम त्रिवेदी, उपेंद्र चौधरी, अम्बरीष कुमार राय, ब्रह्मानंद शुक्ल आदि लोग शामिल रहे।

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