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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डीएलएड् (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग) अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। खंडपीठ ने इन अभ्यर्थियों को यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में अस्थायी (प्रोविजनल) आधार पर शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों का अंतिम चयन याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार को इस मामले में जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम कुमार शुक्ला सहित 36 याचियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचियों ने मांग की थी कि डीएलएड (ओडीएल) अभ्यर्थियों को यूपी-टीईटी 2026 के आवेदन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि पात्रता 2019 के नियमों के अनुसार तय की जाती है। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, 18 माह का डीएलएड (ओडीएल) डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी सरकारी स्कूलों सहित अन्य संस्थानों में नियुक्ति के योग्य हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को टीईटी में बैठने से रोकना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 10 अगस्त 2017 या उससे पहले से कार्यरत और 18 माह का डीएलएड (ओडीएल) डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थियों को यूपी-टीईटी 2026 में प्रोविजनल रूप से शामिल किया जाए। हालांकि, उनका अंतिम परिणाम न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
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हाईकोर्ट की डीएलएड् ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग अभ्यर्थियों को अनुमति:यूपी-टीईटी 2026 में अस्थायी रूप से शामिल हो सकेंगे, लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश