यूपी के 25 जिले का पारा 40 डिग्री तक पहुंचा:अगले 48 घंटे में एक्टिव होगा नया पश्चिमी विक्षोभ, झांसी रहा सबसे गर्म शहर


उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और बढ़ती तपिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को प्रदेश के करीब 25 जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के जिलों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जहां तेज धूप और लू जैसे हालात ने जनजीवन को प्रभावित किया। 2 दिन होगी भीषण गर्मी
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि 9 और 10 जून को अधिकांश जिलों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे गर्मी का असर और तेज हो सकता है। 11 जून का आयेगा नया पश्चिमी विक्षोभ
हालांकि, 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से 11 से 13 जून के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं। राजधानी लखनऊ में भी बुधवार को देर-सवेर बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है।
9 जून को 16 जिलों में हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग ने 9 जून के लिए प्रदेश के 16 जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल के कई जिलों में दिन के समय तेज गर्म हवाएं चलने और तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, संत रविदास नगर (भदोही), वाराणसी और चंदौली में हीटवेव का असर देखने को मिल सकता है। 11 जून के बाद प्री-मानसून बारिश शुरू होगी
IMD के मुताबिक, 9 जून से 3 दिन हीटवेव (लू) चलेगी। 11 जून के बाद प्री-मानसून बारिश का सिलसिला शुरू होगा। इस बार यूपी में मानसून 4 से 6 दिन लेट पहुंच सकता है। इसके 24 जून तक यूपी में प्रवेश करने की संभावना है। अगले 3 दिन कैसा रहेगा मौसम? जानिए- यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम होगी
सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी
यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है। सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है। पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही। ——————–

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *